अंतर्लापिका का अर्थ
[ anetrelaapikaa ]
अंतर्लापिका उदाहरण वाक्य
परिभाषा
संज्ञा- यह अंतर्लापिका का एक उदाहरण है जिसका उत्तर आरी है"
उदाहरण वाक्य
अधिक: आगे- उद्देश्य रखकर ये बैठे हैं वहाँ श्लेष , यमक, अंतर्लापिका, बहिर्लापिका सब
- यद्यपि अनुप्रासयुक्त सरस कोमल पदावली का बराबर व्यवहार हुआ है , पर जहाँ चमत्कार का प्रधान उद्देश्य रखकर ये बैठे हैं वहाँ श्लेष, यमक, अंतर्लापिका, बहिर्लापिका सब कुछ मौजूद है।
- यद्यपि अनुप्रासयुक्त सरस कोमल पदावली का बराबर व्यवहार हुआ है , पर जहाँ चमत्कार का प्रधान उद्देश्य रखकर ये बैठे हैं वहाँ श्लेष, यमक, अंतर्लापिका, बहिर्लापिका सब कुछ मौजूद है।
- यद्यपि अनुप्रासयुक्त सरस कोमल पदावली का बराबर व्यवहार हुआ है , पर जहाँ चमत्कार का प्रधान उद्देश्य रखकर ये बैठे हैं वहाँ श्लेष , यमक , अंतर्लापिका , बहिर्लापिका सब कुछ मौजूद है।
- यद्यपि अनुप्रासयुक्त सरस कोमल पदावली का बराबर व्यवहार हुआ है , पर जहाँ चमत्कार का प्रधान उद्देश्य रखकर ये बैठे हैं वहाँ श्लेष , यमक , अंतर्लापिका , बहिर्लापिका सब कुछ मौजूद है।
- बजरंग वर्मा एवं कामेश् वर शर्मा ' नयन ' , 1984 ई. ) के अनुसार ये कृतियॉं हैं- ' ऋतु-वर्णन ' , ' छंदसरोवर ' , ' चित्रकाव् यमद्य ' , ' गंगालहरी ' , ' ध् यानकल् याण ' , ' निर्णयछंद-प्रबंध ' , ' बारहमासा ' , ' कविप्रकाश ' , ' रस-वर्णन ' , ' वर्ण-विचार ' , ' अंतर्लापिका ' श्रीनगर-बनैली के राज्याश्रित कवियों में जयगोविन्द महाराज का नाम सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है।
- बजरंग वर्मा एवं कामेश् वर शर्मा ' नयन ' , 1984 ई. ) के अनुसार ये कृतियॉं हैं- ' ऋतु-वर्णन ' , ' छंदसरोवर ' , ' चित्रकाव् यमद्य ' , ' गंगालहरी ' , ' ध् यानकल् याण ' , ' निर्णयछंद-प्रबंध ' , ' बारहमासा ' , ' कविप्रकाश ' , ' रस-वर्णन ' , ' वर्ण-विचार ' , ' अंतर्लापिका ' श्रीनगर-बनैली के राज्याश्रित कवियों में जयगोविन्द महाराज का नाम सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है।
- बजरंग वर्मा एवं कामेश् वर शर्मा ' नयन ' , 1984 ई. ) के अनुसार ये कृतियॉं हैं- ' ऋतु-वर्णन ' , ' छंदसरोवर ' , ' चित्रकाव् यमद्य ' , ' गंगालहरी ' , ' ध् यानकल् याण ' , ' निर्णयछंद-प्रबंध ' , ' बारहमासा ' , ' कविप्रकाश ' , ' रस-वर्णन ' , ' वर्ण-विचार ' , ' अंतर्लापिका ' श्रीनगर-बनैली के राज्याश्रित कवियों में जयगोविन्द महाराज का नाम सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है।
- बजरंग वर्मा एवं कामेश् वर शर्मा ' नयन ' , 1984 ई. ) के अनुसार ये कृतियॉं हैं- ' ऋतु-वर्णन ' , ' छंदसरोवर ' , ' चित्रकाव् यमद्य ' , ' गंगालहरी ' , ' ध् यानकल् याण ' , ' निर्णयछंद-प्रबंध ' , ' बारहमासा ' , ' कविप्रकाश ' , ' रस-वर्णन ' , ' वर्ण-विचार ' , ' अंतर्लापिका ' श्रीनगर-बनैली के राज्याश्रित कवियों में जयगोविन्द महाराज का नाम सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है।