अप्रवृत्ति का अर्थ
[ aperveriteti ]
अप्रवृत्ति उदाहरण वाक्य
परिभाषा
संज्ञा- प्रवृत्ति का अभाव या चित्त या मन का झुकाव न होने की अवस्था :"अप्रवृत्ति के कारण वह जीवन से निराश रहने लगा है"
उदाहरण वाक्य
- “उणादयो बहुलम्” सूत्रनिर्देश से यह स्पष्ट है कि इनकी स्थिति ठीक नहीं है-कहीं इनकी प्रवृत्ति है अर्थात् धात्वर्थ के साथ सुयोज्यता है , कहीं अप्रवृत्ति अर्थात् अयोग्यता, कहीं किसी प्रकार युक्त होना और कहीं नहीं, कभी कुछ और कभी कुछ।
- तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन ॥ भावार्थ : हे अर्जुन ! तमोगुण के बढ़ने पर अन्तःकरण और इंन्द्रियों में अप्रकाश , कर्तव्य-कर्मों में अप्रवृत्ति और प्रमाद अर्थात व्यर्थ चेष्टा और निद्रादि अन्तःकरण की मोहिनी वृत्तियाँ - ये सब ही उत्पन्न होते हैं॥ 13 ॥ यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत् ।
- - कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार अर्थ का नाश , धर्मक्रिया का लोप , कर्मों में अप्रवृत्ति , सत्पुरुषों के समागम से विरक्ति , दुष्टों के साथ उठना बैठना , हर समय क्रोध , हर्ष और संताप होना और क्लेख करना स्नानादि शरीर संस्कार और उसके भोग में अनादर , व्यायाम न करना , अंगों की दुर्बलता , शास्त्र के अर्थ को देखना मूत्रपूरीध के वेग को रोकना , भूख प्यास से अपने को ही पीड़ा देना यह सभी प्रमाण द्यूत या जुए के लक्षण हैं …………………………… .