अलम्बुषा का अर्थ
[ alembusaa ]
अलम्बुषा उदाहरण वाक्य
परिभाषा
संज्ञा- एक छोटा कँटीला पौधा:"छुईमुई को स्पर्श करने से उसके पत्ते सिकुड़ जाते हैं"
पर्याय: छुईमुई, लाजवती, लाजवंती, लजवंती, लाजवन्ती, लजवन्ती, लजालू, लज्जावंती, लज्जावन्ती, स्पर्शलज्जा, लघुकंटकी, लघुकण्टकी, खदिरी, खदिरपत्ती, खदिरपत्री, चित्रपदा, रक्तपदी, समंगा, वृहद्दल, वृहद्दला, अलंबुषा, रक्त-पुष्पिका, रक्तपुष्पिका, ताम्रमूला, रक्तमूला, वराहक्रांता, वराहक्रान्ता - एक प्रकार का पौधा:"गोरखमुंडी में छोटे,गोल और गुलाबी रंग के फूल आते हैं"
पर्याय: गोरखमुंडी, गोरखमुण्डी, उंडी, उण्डी, पलंकषा, पलंकषी, तपोधना, अरुणा, अलंबुषा, व्रणजिता, अव्यथा, महाश्रय - एक अप्सरा :"अलंबुषा का वर्णन पुराणों में मिलता है"
पर्याय: अलंबुषा - घुसने से रोकने के लिए खींची गई रेखा:"अलंबुषा पार कर सीता भीख देने बाहर आ गई थी"
पर्याय: अलंबुषा
उदाहरण वाक्य
अधिक: आगे- इसलिये उन्होंने महर्षि की तपस्या को खण्डित करने के उद्देश्य से परम रूपवती अलम्बुषा अप्सरा के साथ कामदेव को भेजा।
- इसलिये उन्होंने महर्षि की तपस्या को खण्डित करने के उद्देश्य से परम रूपवती अलम्बुषा अप्सरा के साथ कामदेव को भेजा।
- अलम्बुषा और कामदेव के अथक प्रयत्न के बाद भी महर्षि अविचल रहे और अन्त में विफल मनोरथ होकर दोनों इन्द्र के पास लौट गये।
- अलम्बुषा और कामदेव के अथक प्रयत्न के बाद भी महर्षि अविचल रहे और अन्त में विफल मनोरथ होकर दोनों इन्द्र के पास लौट गये।
- पांच ग्यानेन्द्रिया होती हैं । इडा । पिंगला । सुष्मणा । गान्धारी । गजजिह्या । पूषा । यषा । अलम्बुषा । कुहू । शंखिनी ।
- वैसे शास्त्र हमारे शरीर में 72000 नाड़ियों की स्थिति बताते हैं , जिनमें से 10 मुख्य है:- इडा, पिंगला, सुषुम्ना, गांधारी, हस्तिजिह्वा, पूषा, यशस्विनी, अलम्बुषा, कुहू और शंखिनी।
- दम से राज्यवर्धन , उससे सुधृति, सुधृति से नर, नर से केवल, केवल के बंधुमान, उससें वेगवान, वेगवान से बंधु, बंधु से तृणा, तृणा से बिन्दु ने अलम्बुषा अप्सरा से विवाह किया।
- दम से राज्यवर्धन , उससे सुधृति , सुधृति से नर , नर से केवल , केवल के बंधुमान , उससें वेगवान , वेगवान से बंधु , बंधु से तृणा , तृणा से बिन्दु ने अलम्बुषा अप्सरा से विवाह किया।
- मेरूदण्ड के बायें भाग में इड़ा , दाहिने भाग में पिंगला , मध्य में सुषुम्ना , बायें नेत्र में गांधारी , दायें नेत्र में हस्ति-जिह्ना , बायें कान में यशस्विनी , दायें कान में पूषा , मुख में अलम्बुषा , लिंग में में कुहु तथा गुदा में शंखिनी का वास है।
- शरीर रचना में नाड़ियों का कार्य - शरीर रचना में तो सामान्यतः बहत्तर ( 72 ) करोड़ नाड़ियों की व्यवस्था इस शरीर के अन्दर की गई है जिनमें दस प्रधान नाड़ियाँ हैं - ( 1 ) इंगला नाड़ी ( 2 ) पिंगला नाड़ी ( 3 ) सुषुम्ना नाड़ी ( 4 ) गान्धारी ( 5 ) गज जिह्वा ( 6 ) यशस्विनी ( 7 ) पूषा ( 8 ) कुहु ( 9 ) अलम्बुषा ( 10 ) शंखिनी ।