आकाश-दीप का अर्थ
[ aakaash-dip ]
आकाश-दीप उदाहरण वाक्य
परिभाषा
संज्ञा- वह दीपक जो कार्तिक के महीने में हिन्दू लोग कंडील में रखकर, ऊँचे बाँस के सिरे पर बाँधकर जलाते हैं :"आकाशदीप की रोशनी दूर से दिखाई दे रही थी"
पर्याय: आकाशदीप, आकाशदीया, आकाशप्रदीप, आकाश-प्रदीप - बहुत अधिक ऊँचाई पर जलनेवाला दीया:"नाविक आकाशदीप की ओर अपनी नाव खेने लगा"
पर्याय: आकाशदीप, आकाशदीया, आकाशप्रदीप, आकाश-प्रदीप
उदाहरण वाक्य
- तुलार्क पर्यन्त आकाश-दीप जलाने की प्रथा है।
- चम्पा की कामना थी कि उसका आकाश-दीप नक्षत्रों से हिलमिल जाय ; किन्तु वैसा होना असम्भव था।
- दूसरे दिन बलि प्रथमा के रूप में उनकी पूजा की जाती , वामन के त्रिविक्रम आकाश-विजय के चिह्न के रूप में आकाश-दीप सजाया जाता।
- रेलवे लाइन के उस पार दिगंत विस्तृत ज्योत्स्ना-राशि अपने आवेश में स्वयं पुलकित हो रही थी और सामने काफी दूर पर दो रक्तरंजित गोलाकार प्रकाश-चिह्न आकाश-दीप की तरह मानो आनंदोज्ज्वल रंगीन जीवन का मार्ग उसके लिए इंगित कर रहे थे।
- यह थ्योरी कहाँ तक मान्य है , इस बहस में तो वैज्ञानिक पड़ें , पर उनको देखते हुए उनके बारे में जरूर इसकी सच्चाई मानो ज्वलन्त होकर सामने आ जाती थी , उनकी आत्मा न केवल पंगु नहीं थी , वरन् शरीर के अवयव जितने कम होते जाते थे , उसमें आत्मा की कान्ति मानो बढ़ती जाती थी मानो व्यर्थ से सिमट-सिमटरकर आत्मा बचे हुए शरीर में और घनी पुंजित होती जाती-सारे शरीर में भी नहीं , एक अकेली आँख में - प्रेतात्माओं से भरे हुए विशाल शून्य में निष्कम्प दिपते हुए एक आकाश-दीप के समा न. ..