आनाह का अर्थ
[ aanaah ]
आनाह उदाहरण वाक्य
परिभाषा
संज्ञाउदाहरण वाक्य
अधिक: आगे- गुल्य , आनाह , विरेचन कर्म , आस्थापन तथा वस्ति व्याधियों में गोमूत्र का प्रयोग उत्तम रहता है।
- गुल्य , आनाह , विरेचन कर्म , आस्थापन तथा वस्ति व्याधियों में गोमूत्र का प्रयोग उत्तम रहता है।
- यह आनाह ( अफारा ) और कोष्ठबद्धता ( कब्ज ) को दूर करने के लिए रामबाण औषध है ।
- ये 2-2 गोली सुबह-शाम पानी के साथ लेने से पेट दर्द दूर होता है , आध्मान आनाह, सिर दर्द आदि व्याधियों में भी लाभ होता है।
- ये 2 - 2 गोली सुबह-शाम पानी के साथ लेने से पेट दर्द दूर होता है , आध्मान आनाह , सिर दर्द आदि व्याधियों में भी लाभ होता है।
- यह कफ , वात कोढ़ , कृमि ( पेट के कीड़े ) , आनाह ( वायु के कारम पेट फूटना ) , सूजन और उदर रोगों को दूर करता है।
- यह कफ , वात कोढ़ , कृमि ( पेट के कीड़े ) , आनाह ( वायु के कारम पेट फूटना ) , सूजन और उदर रोगों को दूर करता है।
- अनेक प्रकार के गुणों से भरपूर अजवायन पाचक रूचि कारक , तीक्ष्ण , कढवी , अग्नि प्रदीप्त करने वाली , पित्तकारक तथा शूल , वात , कफ , उदर आनाह , प्लीहा , तथा क्रमि इनका नाश करने वाली होती है।
- आता हो उसे पिली हर्र नहीं खाना चाहिए ! विशेषकर यह हर्र स्वास खांसी ,बवासिर ,शोथ, कोढ,कृमि रोग उदर विकार,अफरा,गुल्म,प्यास ,हिचकी ,कामला अर्जीण , आनाह , प्लिहा ,शूल ,पथरी ,यकृत, सूजाक,मूत्रघात ,इन सब रोगों को विधि पूर्वक सेवन करने से शांत करती है |
- आता हो उसे पिली हर्र नहीं खाना चाहिए ! विशेषकर यह हर्र स्वास खांसी ,बवासिर ,शोथ, कोढ,कृमि रोग उदर विकार,अफरा,गुल्म,प्यास ,हिचकी ,कामला अर्जीण , आनाह , प्लिहा ,शूल ,पथरी ,यकृत, सूजाक,मूत्रघात ,इन सब रोगों को विधि पूर्वक सेवन करने से शांत करती है |