आयसी का अर्थ
[ aayesi ]
आयसी उदाहरण वाक्य
परिभाषा
विशेषणउदाहरण वाक्य
अधिक: आगे- “ आयसी जंघा विश्पलाये अदध्यनतम ” . [रिग्वेद्य १/ ११६]
- “ आयसी जंघा विश्पलाये अदध्यनतम ” .
- उफ़ अब क्या जान लोगे यार बहुत मस्त और आयसी
- तब उन्हें और उनके परिवार को बस्ती में आयसी जलालत को नहीं ढोना पड़ता .
- में कहा है कि साहेब तख्त कबीर ख्वासा दिल्ली मण्डल लीजै वासा , सतगुरू दिल्ली मण्डल आयसी
- गरीब , जे मन गया तो जान दे , मनसा कूँ गहि लेह | फिर घर द्वारे आयसी , दीखे पाकरि लेह || ७ ० ||
- ' ' “ आयसी जंघा विश्पलाए अद्यन्तम् ” ( ऋग्वेद 1 / 116 ) अर्थात् विश्पला का पैर ठीक किया और उस पर लोहे का पैर जोड़कर उसको वापस खड़ा किया।
- सन्त गरीबदास जी छुड़ानी वाले ने “ असुर निकन्दन रमैणी ” में कहा है कि साहेब तख्त कबीर ख्वासा दिल्ली मण्डल लीजै वासा , सतगुरू दिल्ली मण्डल आयसी सुती धरती सूम जगायसी।
- स्कन्द पुराण में त्रिपुर नामक असुर पर उज्जिति से उज्जयिनी नाम होने के संदर्भ में तीन पुर , जिन पर विजय प्राप्त करनी है , पृथिवी , अन्तरिक्ष व द्युलोक कहे जाते हैं जो आयसी , रजतमय व स्वर्णिम हैं ।
- विल्लाख चासू ” नामक ग्रन्थ में बताया गया है , आयसी ( रेवती ) , मंचूक ( अश्विनी ) , खन्श ( मूल ) , दायला ( मघा ) एवं खिचास्तो ( अश्लेषा ) में जन्म लेने वाले व्यक्तियों पर इस वृक्ष के पत्तो का कोई प्रभाव नहीं होता।