कुटीचक का अर्थ
[ kutichek ]
कुटीचक उदाहरण वाक्य
परिभाषा
संज्ञा- चार प्रकार के संन्यासियों में से पहला जो अपने या अपने कुटुम्बियों के घर रहता है:"कुटीचक शिखा-सूत्र का त्याग नहीं करता है"
पर्याय: पुत्रन्नाद
उदाहरण वाक्य
- यहां पर इन्हें चार श्रेणियों कुटीचक , बहूदक , हंस एवं परमहंस में बांटा गया है जिसमें से सर्वप्रथम है ,
- कुटीचक , बहूदक , हंस और परमहंस संन्यास के भेदों में विभक्त होते हैं जिन्हें अवधूत कहा जाता है और इन सबमें परमहंस सबसे श्रेष्ठ अवस्था मानी गई है .
- और निरंतर ही साधना में आगे बढता जाता है जिसमें से वह पहले मार्ग में कुटीचक को पाता है फिर वहूदक की श्रेणी को प्राप्त करता है तत्पश्चात वह हंस बनता है और बाद में परमहंस हो जाता है .
- संन्यासी जो ज्ञान की परमावस्था को प्राप्त करने के लिए निम्न श्रेणीयों को पाता है तथा परमहंस होकर सच्चिदानंद ब्रह्म मैं ही हूँ ' इस अर्थ को पूर्ण रूप से अनुभव करता है , कुटीचक , बहूदक , हंस और परमहंस जो चार प्रकार के अवधूत कहे गए हैं जिन सबमें परमहंस सबसे श्रेष्ठ माना गया है .
- संन्यासी जो ज्ञान की परमावस्था को प्राप्त करने के लिए निम्न श्रेणीयों को पाता है तथा परमहंस होकर सच्चिदानंद ब्रह्म मैं ही हूँ ' इस अर्थ को पूर्ण रूप से अनुभव करता है , कुटीचक , बहूदक , हंस और परमहंस जो चार प्रकार के अवधूत कहे गए हैं जिन सबमें परमहंस सबसे श्रेष्ठ माना गया है .