क्षुद्रांत का अर्थ
[ kesuderaanet ]
क्षुद्रांत उदाहरण वाक्य
परिभाषा
संज्ञाउदाहरण वाक्य
- इसी प्रकार सारे क्षुद्रांत की भित्तियों में स्थित असंख्य ग्रंथियाँ भी रसोत्पादन करती हैं , जो आंत्र के भीतर पहुँचकर पाचन में सहायक होता है।
- इस रोग के जीवाणुओं के शरीर में प्रवेश कर जाने के कारण आंतों के क्षुद्रांत और अंत्रपुट प्रदेश के अंतिम अंक्ष की कई ग्रंथियां फूल जाती हैं।
- गुर्दा , किडनी), वस्ति (यूरिनरी ब्लैडर), क्षुद्रांत (स्मॉल इंटेस्टिन), स्थूलांत्र (लार्ज इंटेस्टिन), वपावहन (मेसेंटेरी), पुरीषाधार, उत्तर और अधरगुद (रेक्टम), ये कोष्ठांग हैं और सिर में सभी इंद्रियों और प्राणों के केंद्रों का आश्रय मस्तिष्क (ब्रेन)है।
- इनके अतिरिक्त हृदय , फुफ्फुस (लंग्स), यकृत (लिवर), प्लीहा (स्प्लीन), आमाशय (स्टमक), पित्ताशय (गाल ब्लैडर), वृक्क (गुर्दा, किडनी), वस्ति (यूरिनरी ब्लैडर), क्षुद्रांत (स्मॉल इंटेस्टिन), स्थूलांत्र (लार्ज इंटेस्टिन), वपावहन (मेसेंटेरी), पुरीषाधार, उत्तर और अधरगुद (रेक्टम), ये कोष्ठांग हैं और सिर में सभी इंद्रियों और प्राणों के केंद्रों का आश्रय मस्तिष्क (ब्रेन)है।