डसी का अर्थ
[ desi ]
डसी उदाहरण वाक्य
परिभाषा
संज्ञा- स्मृति बनाए रखने के लिए दी या रखी हुई वस्तु:"यह घर हमारे पुरखों की निशानी है"
पर्याय: निशानी, स्मृतिचिह्न, स्मृति चिह्न, स्मृतिचिन्ह, स्मृति चिन्ह, यादगार, चिन्हानी, अभिज्ञा, स्मारिका, स्मारक, अभिज्ञान
उदाहरण वाक्य
अधिक: आगे- विश्वास और भावनाओं में राजस्थान में यहां तक परिपक्वता आ गई है कि उनके नाम की डसी बांधने से सर्प के विष का असर नहीं होता है।
- विश्वास और भावनाओं में राजस्थान में यहां तक परिपक्वता आ गई है कि उनके नाम की डसी बांधने से सर्प के विष का असर नहीं होता है।
- इधर देख , यहाँ नागिन डंक मारती है , नागिन ! ... '' नागिन के डंकों से डसी जीभ बाहर निकालते हुए राम आसरा नीली हुई गर्दन पर हाथ फेरने लगता।
- इसका सबसे तल्ख अहसास शायर को तब हुआ था जब इतनी कुर्बानियों के बाद आई आज़ादी ‘ दाग दाग उजाले ' और ‘ रात से डसी हुई सुबह ' की तरह निकली।
- डसी दौरान 2009 में एक दिन साहब के पास गया पूँछा- “साहब मैं कब अपने घर जाऊँगा , ” तो उन्होंने देखा और कहा- ‘‘तुम्हारी सजा दो महीने पहले पूरी हो गयी है , लेकिन जुर्माना न देने और बीमारी के कारण 2 फरवरी , 2011 में तुम छुटोगे।
- कमजोर नहीं थी स्त्री पैदा हुई जब इस बड़ी धरती पर बढ़े थे उनके भी कदम अनंत दूरी के लिए खानाबदोश मर्दों व नये पालतू बने पशुओं के साथ डसी ने खोजी घर की देहरी पर खड़ी फसलें लहलहातीं अनगिनत सूप से फटकने और बिछने के क्रम में छितरा गई होंगी इधर-उधर बीज-रूप में।
- कवितायें सपना : सांप बचपन की रातें घने जंगल सी सपना - सांप सा नींद डसी जाती रही बार-बार काटा रातों का जंगल खोजा सपनामिला जहाँ - पत्थरों से मारा घायल सपना खो जाता रहा हर बार रातें जवान फिर से जंगल होने लगीं सपना फिर से जिन्दा हुआ सपनों से डरती नहीं अब रात -लेकिन नींद क्योंकि -'साँपों' से खेलने लगी है उम्र अब धीरे-धीरे नियति को तौलने लगी है.0
- अब इन काठ के उल्लुओं को कौन समझाये कि ‘ जहाँ कूपै में भाँग पड़ी है ' यानी कि जहाँ सारे चोर हैं और उनमें से ही किसी एक को चुनना है तो इससे क्या फर्क पड़ता है कि उन्हें एक वोट से चुना जाता है या फिर सौ वोट से ! या साँपनाथ और नागनाथ के चुनाव में चाहे ‘ कुछ ' ले के “ अमूल्य वोट ” दिया जाय या फिर बिना ‘ कुछ ' लिए , डसी तो जनता ही जायेगी ! जनता सब जानती है।
- अब इन काठ के उल्लुओं को कौन समझाये कि ‘ जहाँ कूपै में भाँग पड़ी है ' यानी कि जहाँ सारे चोर हैं और उनमें से ही किसी एक को चुनना है तो इससे क्या फर्क पड़ता है कि उन्हें एक वोट से चुना जाता है या फिर सौ वोट से ! या साँपनाथ और नागनाथ के चुनाव में चाहे ‘ कुछ ' ले के “ अमूल्य वोट ” दिया जाय या फिर बिना ‘ कुछ ' लिए , डसी तो जनता ही जायेगी ! जनता सब जानती है।