मुखरोग का अर्थ
[ mukheroga ]
मुखरोग उदाहरण वाक्य
परिभाषा
संज्ञाउदाहरण वाक्य
अधिक: आगे- मुखरोग का सीधा संबंध तनाव से है
- यह शूल , गुल्म , उदर रोग , अपफरा , खुजली , नेत्रारोग , मुखरोग , कुष्ठ , वात , आम , मूत्राशय के रोग , खाँसी श्वास , शोध् , कामला तथा पाण्डुर रोग को नष्ट करने वाला होता है।
- यह शूल , गुल्म , उदर रोग , अपफरा , खुजली , नेत्रारोग , मुखरोग , कुष्ठ , वात , आम , मूत्राशय के रोग , खाँसी श्वास , शोध् , कामला तथा पाण्डुर रोग को नष्ट करने वाला होता है।
- को रूखा , हलका गरम, पाक में चरपरा, कफ, वात, उदररोग, कृमि, कुष्ठ, गुल्म, प्रमेह, बवासीर और शूल का नाशक; बीज को स्तिग्ध, चरपरा गरम, कफ और कृमि का नाशक और गोंद को मलरोधक, ग्रहणी, मुखरोग, खाँसी और पसीने को दूर करनेवाला लिखा है।
- वैद्यक में इसके फूल को स्वादु , कड़वा , गरम , कसैला , वातवर्धक शीतज , चरपरा , मलरोधक तृषा , दाह , पित्त कफ , रुधिरविकार , कुष्ठ और मूत्रकृच्छ का नाशक ; फल को रूखा , हलका गरम , पाक में चरपरा , कफ , वात , उदररोग , कृमि , कुष्ठ , गुल्म , प्रमेह , बवासीर और शूल का नाशक ; बीज को स्तिग्ध , चरपरा गरम , कफ और कृमि का नाशक और गोंद को मलरोधक , ग्रहणी , मुखरोग , खाँसी और पसीने को दूर करनेवाला लिखा है।
- वैद्यक में इसके फूल को स्वादु , कड़वा , गरम , कसैला , वातवर्धक शीतज , चरपरा , मलरोधक तृषा , दाह , पित्त कफ , रुधिरविकार , कुष्ठ और मूत्रकृच्छ का नाशक ; फल को रूखा , हलका गरम , पाक में चरपरा , कफ , वात , उदररोग , कृमि , कुष्ठ , गुल्म , प्रमेह , बवासीर और शूल का नाशक ; बीज को स्तिग्ध , चरपरा गरम , कफ और कृमि का नाशक और गोंद को मलरोधक , ग्रहणी , मुखरोग , खाँसी और पसीने को दूर करनेवाला लिखा है।