वर्णांध का अर्थ
[ vernaanedh ]
वर्णांध उदाहरण वाक्य
परिभाषा
विशेषण- जिसे लाल,पीले,हरे आदि रंगों का ज्ञान न होता हो:"वर्णांध व्यक्ति रंगों की पहचान नहीं कर पाता"
पर्याय: वर्णांधता से पीड़ित
उदाहरण वाक्य
अधिक: आगे- जन्म के वर्णांध को हरे रंग की मात्रा की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है तथा ऐसे व्यक्ति को हल्के हरे और पीले रंग के अलग-अलग बोध में कठिनाई पड़ती है।
- जन्म के वर्णांध को हरे रंग की मात्रा की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है तथा ऐसे व्यक्ति को हल्के हरे और पीले रंग के अलग-अलग बोध में कठिनाई पड़ती है।
- जिन व्यक्तियों को लाल तथा हरे रंगों का बोध नहीं होता , उन्हें लाल एवं हरा वर्णांध तथा पीले एवं नीले रंगों का बोध न होने पर पीला एवं नीला वर्णांध आदि कहते हैं।
- जिन व्यक्तियों को लाल तथा हरे रंगों का बोध नहीं होता , उन्हें लाल एवं हरा वर्णांध तथा पीले एवं नीले रंगों का बोध न होने पर पीला एवं नीला वर्णांध आदि कहते हैं।
- जिन व्यक्तियों को लाल तथा हरे रंगों का बोध नहीं होता , उन्हें लाल एवं हरा वर्णांध तथा पीले एवं नीले रंगों का बोध न होने पर पीला एवं नीला वर्णांध आदि कहते हैं।
- जिन व्यक्तियों को लाल तथा हरे रंगों का बोध नहीं होता , उन्हें लाल एवं हरा वर्णांध तथा पीले एवं नीले रंगों का बोध न होने पर पीला एवं नीला वर्णांध आदि कहते हैं।
- उनके किसी चमचे ने जहाँ उनकी ठकुरसोहाती की रौ में उनको प्रधानमंत्री बनाने की मांग रखी नहीं कि सिरिमान ( श्रीमान ) इस तरह भड़क उठते हैं जैसे वर्णांध सांढ़ लाल कपड़े को देखकर।
- यह सच है कि ऐसा वर्णांध व्यक्ति रंग की विविध गहराई , चमक, तथा आकार से ही वस्तुओं को पहचान लेने की शक्ति उत्पन्न कर लेता है, लेकिन ऐसा व्यक्ति ठीक ठीक रंग पहचानने के ज्ञान पर निर्भर विषयों पर निश्चय लेने में गलती करता है, जिसका भीषण परिणाम हो सकता है, उदाहरणार्थ ट्रैफिक सिगनल पहचानने की गलती आदि।
- यह सच है कि ऐसा वर्णांध व्यक्ति रंग की विविध गहराई , चमक, तथा आकार से ही वस्तुओं को पहचान लेने की शक्ति उत्पन्न कर लेता है, लेकिन ऐसा व्यक्ति ठीक ठीक रंग पहचानने के ज्ञान पर निर्भर विषयों पर निश्चय लेने में गलती करता है, जिसका भीषण परिणाम हो सकता है, उदाहरणार्थ ट्रैफिक सिगनल पहचानने की गलती आदि।
- हमें अधिकार है नीग्रो समाज से आशा करने का कि वो अपने उत्तरदायित्व को समझें , कानून का पालन करें, किंतु उन्हें भी अधिकार है इस बात की आशा करने का कि देश का कानून निष्पक्ष हो, और जैसा कि नई शताब्दी में प्रवेश के समय जस्टिस हर्लान ने कहा था, संविधान को पूरी तरह से वर्णांध होना चाहिए यही मुद्दा आज चर्चा का विषय है और यही वह मुद्दा है जो इस राष्ट्र और इसके मूल्यों के लिए घोर चिंता का विषय बना हुआ है.इससे निपटने के लिए मुझे इस देश के सभी निवासियों का सहयोग चाहिए. धन्यवाद.