स्कंधफलक का अर्थ
[ seknedheflek ]
स्कंधफलक उदाहरण वाक्य
परिभाषा
संज्ञा- कंधे के पश्चभाग को बनाने वाली एक बड़ी, चपटी और तिकोनी हड्डी:"साइकिल से गिरने के कारण उसके अंशफलक में दरार पड़ गई है"
पर्याय: अंशफलक, अंसफलक, स्कन्धफलक, स्कंधास्थि
उदाहरण वाक्य
अधिक: आगे- इसके बाद चिकित्सक अपने अंगूठों को रोगी व्यक्ति के दाएं-बाएं मध्य स्कंधफलक के बिन्दुओं पर रखना चाहिए और सहारे के लिए उंगलियों को ऊपरी स्कंधफलक के भाग पर रखना चाहिए।
- इसके बाद चिकित्सक अपने अंगूठों को रोगी व्यक्ति के दाएं-बाएं मध्य स्कंधफलक के बिन्दुओं पर रखना चाहिए और सहारे के लिए उंगलियों को ऊपरी स्कंधफलक के भाग पर रखना चाहिए।
- इसके बाद रोगी व्यक्ति को पेट के बल लिटाकर उसके दाएं भाग पर तथा बाएं भाग के मध्य ( कंधे और गर्दन के बीच का भाग ) स्कंधफलक क्षेत्रों के तीनों बिन्दुओं पर दबाव देकर उपचार करना चाहिए।
- फिर इसके बाद रोगी के शरीर के दाएं व बाएं ऊपरी स्कंधफलक ( कंधे के ऊपर का भाग ) क्षेत्र तथा मध्य स्कंधफलक ( कंधे और गर्दन के बीच का भाग ) क्षेत्र के पांच बिन्दुओं पर दबाव देना चाहिए।
- फिर इसके बाद रोगी के शरीर के दाएं व बाएं ऊपरी स्कंधफलक ( कंधे के ऊपर का भाग ) क्षेत्र तथा मध्य स्कंधफलक ( कंधे और गर्दन के बीच का भाग ) क्षेत्र के पांच बिन्दुओं पर दबाव देना चाहिए।
- श्लेष्मक गुहाओं में स्थित तरल की कमी हो जाती है , जो आम तौर फ्रोजेन शोल्डर में प्रगंडिका (ऊपरी बांह की हड्डी) एवं स्कंधफलक में गर्तिका (स्कंधास्थि) के बीच के अंतराल को चिकना बनाकर कंधे के जोड़ की गति में मदद करता है.
- श्लेष्मक गुहाओं में स्थित तरल की कमी हो जाती है , जो आम तौर फ्रोजेन शोल्डर में प्रगंडिका (ऊपरी बांह की हड्डी) एवं स्कंधफलक में गर्तिका (स्कंधास्थि) के बीच के अंतराल को चिकना बनाकर कंधे के जोड़ की गति में मदद करता है.
- इसके बाद दबाव शरीर के बाईं तरफ से शुरू करते हुए मध्य स्कंधफलक की दोनों ओर की पांच बिन्दुओं वाली दोनों रेखाओं पर बारी-बारी से दबाव देना चाहिए और सभी बिन्दुओं पर दबाव कम से कम तीन सेकेण्ड के लिए देना चाहिए।
- श्लेष्मक गुहाओं में स्थित तरल की कमी हो जाती है , जो आम तौर फ्रोजेन शोल्डर में प्रगंडिका (ऊपरी बांह की हड्डी ) एवं स्कंधफलक में गर्तिका (स्कंधास्थि) के बीच के अंतराल को चिकना बनाकर कंधे के जोड़ की गति में मदद करता है.
- फिर अपनी कोहनी को बगल में फैलाकर अपने दोनों अंगूठों को रोगी के ऊपरी स्कंधफलक ( कंधे के ऊपर का भाग ) के बिन्दुओं पर रखना चाहिए तथा इसके बाद शेष बची उंगलियों को सहारे के लिए रोगी की छाती पर अर्थात रोगी के स्तन के ऊपर की ओर रखना चाहिए।