• कीटोन |
ketones मीनिंग इन हिंदी
ketones उदाहरण वाक्य
उदाहरण वाक्य
अधिक: आगे- get urine tested for ketones and blood for glucose every four to six hours ;
हर 4-6 घंटे के बाद पेशाब में कीटोंस तथा रक़्त में ग़्लूकोज की मात्रा की जांच करें . - Diagnosis is possible by examining urine for ketones ; this is possible by a chemical test or testape or ketostik .
पेशाब में कीटोंस की जांच करने पर कीटोएसिडोसिस का निदान हो सकता है.यह जांच एक रासायनिक परीक्षण अथवा कीटोस्टिक द्वारा संभव है . - The excess of ketones can cause drowsiness and later unconsciousness and coma in such instances -LRB- diabetes ketoacidosis and coma -RRB- .
कीटोंस को अधिकता से व्यक्ति को मूर्छा छाने लगती है और बाद में बेहोशी तथा गहन बेहोशी छा जाती है . ( इसी अवस्था को डायबिटीक कीटोएसिडोसिस और कौमा कहते हैं ) . - If diagnosis isnot made in time , the individual can develop ketones in the urine -LRB- glucose being not metabolised due to absence of insulin ; fat stores are mobilised toprovide energy -RRB- .
यदि सही समय पर इन रोगियों का इलाज नहीं होता है तो रोगियों के पेशाब में कीटोंस नामक रासायनिक पदार्थ आने लगते हैं ( इंसुलिन की कमी के कारण ग़्लूकोज का चयापचय नहीं होता है तथा ऊर्जा प्रदान करते के लिए वसा के भंडारों का प्रयोग होने लगता है ) . - This can happen even long after exercise , e.g . four to ten hours . Considerations It is important to have overall good glucose control before exercise . If blood glucose is 250 mg/dl and ketones are present , exercise will probably worsen the control and cause metabolic instability .
विचारणीय बातें व्यायाम से पूर्व रक़्त ग़्लूकोज स्तर पर अच्छा नियंत्रण होना आवश्यक है यदि रक्त ग्लूकोज का स्तर 250 मि . ग्रा./100 है और कीटोंस भी उपस्थित हैं तो शायद व्यायाम से स्थिति और भी खाराब हो सकती है तथा नियंत्रण खराब होने के कारण चयापचय में अस्थिरता आ सकती - In early stages , taking additional insulin , improving fluid intake and treating the precipitating cause may circumvent the situation . In this status , someone close should be there to monitor the progress and check urine ketones and blood glucose frequently . The decision for hospitalisatipn should be arrived at if there are no signs of improvement or there are changes in consciousness that seem to progress rapidly .
इस अवस्था की शुरुआत में अतिरिक़्त इंसुलिन लेकर , अधिक मात्रा में तरल पदार्थो को पीकर तथा इस अवस्था के लिए जिममेदार कारणों का उपचार करके उस पर काबू पाया जा सकता है.इस अवस्था में रोगी के पास कोई नजदीकी व्यक्ति अवश्य रहे और रोगी की अवस्था पर निगाह रखे तथा बार-बार पेशाब में कीटोंस और रक़्त ग़्लूकोज स्तर की जांच करे . यदि रोगी कर स्थिति में कोई सुधार न हो रहा हो या होश में तेजी से बिगड़ाव आ रहा हो तो उसे अस्पताल में दाखिल कराने का निर्णय लें .