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literal उदाहरण वाक्य

literal हिंदी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. When selecting text by word, sequences of these characters are considered single words. Ranges can be given as “A-Z”. Literal hyphen (not expressing a range) should be the first character given.
    जब पाठ को शब्द से चुना जाता है, इस वर्ण की श्रृंखला को एक शब्द माना जा सकता है. परिसर को “A-Z” के रूप में दिया जाता है. शाब्दिक हाइफन (not expressing a range) दिया गया पहला वर्ण होना चाहिए.
  2. Doctor Hazariprasad Dwivedi wrote - “”some of the lines of the prose Sursagar convey that Surdas called himself blind since birth and unlucky by deeds, but the meaning of the words are not in the literal sense“”
    डॉक्टर हजारीप्रसाद द्विवेदी ने लिखा है - सूरसागर के कुछ पदों से यह ध्वनि अवश्य निकलती है कि सूरदास अपने को जन्म का अन्धा और कर्म का अभागा कहते हैं पर सब समय इसके अक्षरार्थ को ही प्रधान नहीं मानना चाहिए।
  3. Dr.Hazariprasad Trivedi has written-“”Through some worods contained in Sursaga, it could be inferred that though Surdas talks about himself as blind by birth and incomplete in works towards the Lord, their literal meaning is not to be taken.
    डॉक्टर हजारीप्रसाद द्विवेदी ने लिखा है - सूरसागर के कुछ पदों से यह ध्वनि अवश्य निकलती है कि सूरदास अपने को जन्म का अन्धा और कर्म का अभागा कहते हैं पर सब समय इसके अक्षरार्थ को ही प्रधान नहीं मानना चाहिए।
  4. Then he analysed the language of Section 124-A R.P.C . and said : ” The language of Section 124-A Ranjit Penal Code , if read literally , even with the explanations attached to it , would suffice to make a surprising number of persons in this country guilty of sedition ; no one however supposes that it is to be read in this literal sense .
    तदुपरांत उन्होंने आर.पी.सी . की धारा 124-ए की भाषा का विश्लेषण करते हुए कहा- ” रणजीत पीनल कोड की धारा 124-ए की भाषा को अगर अक्षरश : पढ़ा जाये , उससे संलग़्न व्याख़्याओं को भी , तो वह इस देश की बहुतायत जनसंख़्या को राजद्रोही साबित करने के लिए पर्याप्त है , बहरहाल कोई भी इसे शाब्दिक अर्थ में नहीं लेता .
  5. Others in Mr. Kerry's camp also disdain the war concept. Richard Holbrooke, touted as the Democrat's possible secretary of state, says that “We're not in a war on terror, in the literal sense. The war on terror is like saying ‘the war on poverty.' It's just a metaphor.” To which Bush replies , “Anyone who thinks we are fighting a metaphor does not understand the enemy we face and has no idea how to win the war and keep America secure.”
    केरी के पक्ष के अन्य लोग भी युद्ध की धारणा का तिरस्कार करते हैं.डेमोक्रेट की ओर से संभावित गृह मंत्री रिचर्ड होलब्रुक ने कहा कि “शाब्दिक अर्थो में हम आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध की स्थिति में नहीं है .यह तो वैसे ही है जैसे गरीबी के विरुद्ध युद्ध .यह एक रुपक है ” . इसका उत्तर देते हुए बुश ने कहा “ यदि कोई सोचता है कि हम रुपक से लड़ रहे हैं तो हम अपने शत्रु को नहीं समझ पा रहे हैं और न ही हमें अंदाजा है कि युद्ध कैसे जीता जाए और अमेरिका के लोगों को सुरक्षित रखा जाए...”
  6. The revisionist account is no idle academic exercise but, as when Judaism and Christianity encountered the Higher Criticism 150 years ago, a deep, unsettling challenge to faith. It will likely leave Islam a less literal and doctrinaire religion with particularly beneficial implications in the case of Islam, still mired in doctrines of supremacism and misogyny. Applause, then for plans to translate Did Muhammad Exist? into major Muslim languages and to make it available gratis on the Internet. May the revolution begin. Related Topics: History , Islam receive the latest by email: subscribe to daniel pipes' free mailing list This text may be reposted or forwarded so long as it is presented as an integral whole with complete and accurate information provided about its author, date, place of publication, and original URL. Comment on this item
    अभ्यासवादियों का यह कार्य कोई आलसी अकादमिक कसरत भर नहीं है वरन जैसे 150 वर्ष पूर्व यहूदियत और ईसाइयत को उच्च स्तरीय आलोचना का सामना करना पडा था जिसने कि आस्था के समक्ष ऐसी चुनौती खडी की जो कि अभी तक सँभाली नहीं जा सकी है । यह इस्लाम को कम साहित्यिक और दार्शनिक मजहब सिद्ध करेगा और जिसका कि इस्लाम के सम्बंध में लाभ भी होगा जो कि अब भी सर्वोच्चता और बलात के सिद्धांत से प्रेरित है। इस बात के लिये करतल ध्वनि हो कि Did Muhammad Exist ? का प्रमुख मुस्लिम भाषाओं में अनुवाद होगा और इंटरनेट पर इसे निशुल्क रखा जायेगा। तो क्या क्रांति का आरम्भ हो सकता है?
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