mongols उदाहरण वाक्य
उदाहरण वाक्य
- In 1258, when the Mongols had defeated Abbasid empire in Baghdad, then the Abbasid Caliphate left over as the only celebrity took shelter in the Egyptian empire Maamluka.
मंगोलों ने जब १२५८ में अब्बासियों को बग़दाद में हरा दिया तब अब्बासी खलीफा एक नाम निहाद हस्ती की तरह मिस्र के ममलूक सम्राज्य की शरण में चले गये। - The nominal allegiance to the Khilafat of Baghdad was transferred after its destruction by the Mongols to the Fatimi Khalifas of Egypt and under the Syeds to Timur .
बगदाद की खिलाफत के प्रति नाममात्र की निष्ठा , मंगोलों द्वारा , उसके विनाश के बाद , इजिप्ट के फत्Lमी खलीफो और सैयदों के अधीन , तैमूर को स्थानांतरित हो गयी . - The comic book, produced by the Teshkeel Media Group of Kuwait, tells a partly-factual, partly-fantastical tale that begins in 1258 A.D., when the Mongols besieged Baghdad. Librarians supposedly saved the wisdom of the city's main library by encoding it in 99 gems that get scattered around the world. The heroes must find these “gems of power” before an arch-villain does. Each of them is an ordinary Muslim who, through contact with a gem, achieves superhuman powers and represents one of God's 99 attributes.
हाँ , एक वर्ष पूर्व हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने कामिक पुस्तकों के कलाकारों के लिये एक कार्यशाला आयोजित की थी कि किस प्रकार “ अमेरिका के लोगों की इस्लाम और मध्य पूर्व को लेकर बेचैनी” को व्यक्त करें। और अब इस सप्ताह के अंत में जार्जटाउन विश्वविद्यालय एक पीबीएस वृत्तचित्र , Wham! Bam! Islam! जारी करेगा जिसके द्वारा एक कामिक पुस्तक The 99 को लेकर उल्लास मनाया जायेगा। - The Mongol invasions of the thirteenth century subjugated much of the Muslim world, a catastrophe only partially mitigated by the Mongols' nominal conversion to Islam. Some thinkers, Ibn Taymiya (d. 1328) in particular, came to distinguish between true and false Muslims; and to give jihad new prominence by judging the validity of a person's faith according to his willingness to wage jihad.
तेरहवीं शताब्दी में मंगोलों के विजय अभियान ने अधिकांश मुस्लिम विश्व को पदाक्रांत कर लिया , यह पीड़ा कुछ मेगेलों द्वारा इस्लाम स्वीकार कर लेने से थोडी मात्रा में कम अवश्य हो गई ...इस दौरान कुछ चिंतक सामने आए जिसमें विशेष रुप से सन् 1328 के इब्न तेमिया शामिल हैं ..जिन्होने सच्चे और झूठे मुसलमान के बीच विभेद करते हुए जिहाद को नया महत्व दिया ..उनके अनुसार जिहाद के संदर्भ में किसी व्यक्ति की प्रामाणिकता इस बात पर निर्भर करती है कि उस व्यक्ति में जिहाद आरंभ करने की इच्छा शक्ति कितनी है ...