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कौड़ी के मोल उदाहरण वाक्य

कौड़ी के मोल अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. कई मुख्यमंत्री 30 सालों तक इस परियोजना को अपने शासन काल में बना नहीं सके, करोड़ों की धनराशि कबाड़ियों के हाथ कौड़ी के मोल बिक गयी तो अब “ बृहद नई कनहर परियोजना ” की एकाएक क्यों आवश्यकता हो गई।
  2. याद दिलाना मुझे कि तुम्हारे भविष्य तुम्हारी सफलता, स्वास्थ्य, सौन्दर्य और तुम्हारी भावनाओं का निर्णय दुनिया के दूसरे कोने में बैठा कोई मार्कैटिंग गुरू अपने विज्ञापनों के लुभावने शब्दों से अपनी कौड़ी के मोल बिकने वाले सामानों से नहीं करेगा।
  3. याद दिलाना मुझे कि तुम्हारे भविष्य तुम्हारी सफलता, स्वास्थ्य, सौन्दर्य और तुम्हारी भावनाओं का निर्णय दुनिया के दूसरे कोने में बैठा कोई मार्कैटिंग गुरू अपने विज्ञापनों के लुभावने शब्दों से अपनी कौड़ी के मोल बिकने वाले सामानों से नहीं करेगा।
  4. बिस्कोमान ने एक बार फिर इसकी तरफ रूख किया 8 मई 2004 को बिक्रमगंज के सभी यूनिट और सोल्मेंट प्लांट की मरम्मति के साथ रखरखाव और चालू करने के शर्त पर 11 साल के कौड़ी के मोल लीज पर प्रमेन्द्र सिंह को दे दिया गया।
  5. यदि आईटी नीति में संशोधन कर जमीन को सब लीज देने का प्रावधान किया जाता है तो इस बात की संभावना बढ़ जाएगी कि आईटी नीति के तहत कौड़ी के मोल मिलने वाली जमीनों को संबंधित कंपनियां सब-लीज के नाम पर करोड़ों में बेंचकर मोटा मुनाफा कमा सकेंगी।
  6. रायपुर में भी दो-पांच सौ छपने वाले अखबारों को भी जिस तरह से कौड़ी के मोल जमीन दी गई है और इन जमीनों का व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है वह सरकार और उसके पूरे कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है कि किस तरह से गलत लोगों को सरकार संरक्षण दे रही है।
  7. राजाओं के मणि-मुक्तकों से जड़े राजमुकुट और सिंहासन, न जाने धराशायी होकर कहाँ धूल चाट रहे होंगे? यह करतूतें उन्हीं पैशाचिक दुष्प्रवृत्तियों की हैं, जो मनुष्य पर उन्माद की तरह छाई रहती हैं और उसकी बहुमूल्य जीवन-सम्पदा को कौड़ी के मोल गँवा देने के लिए दिग्भ्रमित करती रहती हैं।
  8. भूमिहीन किसानों को जमीन उपलब्ध कराने का दावा करने वाली वामपंथी सरकार का चेहरा उसी दिन पूरी तरह बेनकाब हो गया, जब अल्प वैयक्तिक लाभ के लिए पूंजीपतियों के हाथ की कठपुतली बनी बंगाल की सरकार ने सिंगूर और नन्दी ग्राम के गरीब किसानॊं की उपजाऊ जमीन का कौड़ी के मोल बलात अधिग्रहण कर लिया.
  9. बात चाहे जो भी हो लेकिन पाकुड़ के इलामी, लखनपुर, कालीबाड़ी, इसमत कदमसार जैसे गांवों की महिलाओं और बीड़ी मजदूरों की बदहाली की सुधि कोई नहीं लेनेवाला और जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिलेगा वे गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी के चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पायेंगे-बीड़ी के बड़े कारोबारी चाहते भी हैं कि यह चक्रव्यूह बना रहे ताकि कौड़ी के मोल मजदूर मिलते रहें।
  10. ‘विचार-प्रवाह ' के ‘मानव-सत्य' शीर्षक निबंध में उन्होंने लिखा है-“जिस काव्य या नाटक या उपन्यास के पढ़ने से मनुष्य में अपने छोटे संकीर्ण स्वार्थों के बन्धन से मुक्त होने की प्रेरणा नहीं मिलती तथा ‘महान एक' की अनुभूति के साथ अपने-आपको दलित द्राक्षा के समान निचोड़ कर ‘सर्वस्य मूलनिषेचनं' के प्रति तीव्र आकांक्षा नहीं जाग उठती, वह काव्य और वह नाट्य और वह उपन्यास दो कौड़ी के मोल का भी नहीं है।”‘चारु-चन्द्रलेख' में उन्होंने अक्षोभ्य भैरव से कहलवाया है-‘‘देख रे, अर्थशास्त्र और धर्मशास्त्र हर समय साथ-साथ नहीं चलते।
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