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सहज शैली उदाहरण वाक्य

सहज शैली अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. आम रोजमर्रा में पसरे प्लॉट्स को दिव् य ने आम-फहम भाषा और सहज शैली में बस गूंथ दिया है, वैसे ही जैसे बच् चे बिखड़े हुए पजल् स एकजुट करते हैं.
  2. पुस्तक के लोकार्पण के बाद इस अवसर के मुख्य अतिथी व केंद्रीय मंत्री हरीश रावत ने बेहद सहज शैली में बताया कि उत्तराखंड का भूमि-प्रबंधन बहुत पुराना है, लेकिन इसमें सुधार के कार्य अलग राज्य बनने के बाद अपेक्षित गति नहीं पा सके।
  3. सरल भाषा सहज शैली और सत्य का साथ लेकर रचित साहित्य पुरस्कारों के लिए नही लिखा गया लिखा तो सत्यम, शिवम सुन्दरम की प्राप्ति हेतु मानस में तुलसीदासजी ने कहा है-सरल कवित कीरति बिमल सोइ आदरहिं सुजान यही कारण है कि कौतुक के शब्द श्रम को साहित्य जगत ने सराहा आदर दिया सच तो यही है।
  4. सामान्य बोलचाल की सहज शैली से परे शब्दों के इस दंभी लेखन के माध्यम से आपने स्वयं को विशिष्ट समझने वाले व्यक्तियों की जिस मानसिकता का परिचय दिया है वैसा व्यक्तित्व व वैसी शैली प्रायः अपने इर्द-गिर्द देखने में आती ही रहती है और वाकई ऐसे जटिल व्यक्तित्वों के सानिंध्य में कुछ ऐसी कोफ्त भी होती है कि लगता है भैया आप अपने शीशे के केबिन में ही भले ।
  5. फिल्म का क्लाईमेक्स-नव विवाहित युगल के लिए आशीर्वचन कहने के लिए जब सभी लोग अपनी अपनी बात अंग्रेजी में कहकर अंत में शशि से भी आग्रह कराते हैं तब सतीश का उठकर पत्नी शशि की अंग्रेजी की अज्ञानता घोषित करने के लिए तत्परता का प्रदर्शन कराते समय शशि का ' में आई ' कहकर उठना और सहज शैली में अंग्रेजी में वर-वधू के सुखी जीवन के लिए परिवार की अहमियत को भावुकतापूर्ण ढंग से कहना-फिल्म को उस के लक्ष्य तक पहुंचा देता है ।
  6. संस्था के उत्स से ही अपना मार्गदर्शन देते आ रहे “विश्वम्भरा” के संवीक्षक वरिष्ठ कवि-समीक्षक (तेवरी काव्यान्दोलन के प्रणेता) दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा के विश्वविद्यालय खंड (स्नातकोत्तर और शोधसंस्थान) के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर ऋषभदेव शर्मा ने अपनी अत्यंत चिन्तनधर्मी व सहज शैली में कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्था को उसके लक्ष्यों के प्रति सावधान व सचेत रहने की अपनी अपेक्षा दुहराई और उत्तरोत्तर नए संसाधनों के प्रयोग के प्रति जागरूक रह कर कार्यक्षेत्र का निरन्तर विस्तार करने को सराहते हुए नई योजनाओं की रूपरेखा के अनुपालन पर भी बल दिया।
  7. संस्था के उत्स से ही अपना मार्गदर्शन देते आ रहे “विश्वम्भरा” के संवीक्षक वरिष्ठ कवि-समीक्षक (तेवरी काव्यान्दोलन के प्रणेता) दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा के विश्वविद्यालय खंड (स्नातकोत्तर और शोध संस्थान) के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर ऋषभदेव शर्मा ने अपनी अत्यंत चिन्तनधर्मी व सहज शैली में कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्था को उसके लक्ष्यों के प्रति सावधान व सचेत रहने की अपनी अपेक्षा दुहराई और उत्तरोत्तर नए संसाधनों के प्रयोग के प्रति जागरूक रह कर कार्यक्षेत्र का निरन्तर विस्तार करने को सराहते हुए नई योजनाओं की रूपरेखा के अनुपालन पर भी बल दिया।'निर्दोष सोशल सर्विसेज़' के अध्यक्ष डॊ.
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