अदेह का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- छिपा नहीं देवत्व , रंच भर भी , इस मर्त्य-वसन में देह ग्रहण कर्ने पर भी तुम रही अदेह विभा-सी .
- सबसे ध्यान देने योग्य यह है कि ÷ उर्वशी ' का काव्य देह से ÷ अदेह ' में संक्रमित हो जाता है , महज भावोच्छवास द्वारा।
- छायावादी सौन्दर्यबोध और राष्ट्र व परम्परा की शासकीय धारणाओं का अनुभागी होने के चलते दिनकर को इस ÷ अदेह ' के पुंसत्व ने बंधक बना रखा है।
- ÷ उर्वशी ' इसी पुरुष अध्यात्म का रूमान है क्योंकि यहां देह में डूब कर , उसकी तरंगों के आवेग में बह कर ÷ अदेह ' तक पहुंचा गया है।
- ÷÷ मैं अदेह कल्पना , मुझे तुम देह मान बैठे हो : मैं अदृश्य , तुम दृश्य देख कर मुझको समझ रहे हो सागर की आत्मजा , मानसिक तनया नारायण की।
- दीप अंधकार से निकल रहा , क्योंकि तम बिना सनेह जल रहा, जी रही सनेह मृत्यु जी रही, क्योंकि आदमी अदेह ढल रहा, इसलिए सदा अजेय धूल है, इसलिए सदा विजेय श्वास है।
- दीप अंधकार से निकल रहा , क्योंकि तम बिना सनेह जल रहा, जी रही सनेह मृत्यु जी रही, क्योंकि आदमी अदेह ढल रहा, इसलिए सदा अजेय धूल है, इसलिए सदा विजेय श्वास है।
- दीप अंधकार से निकल रहा , क्योंकि तम बिना सनेह जल रहा, जी रही सनेह मृत्यु जी रही, क्योंकि आदमी अदेह ढल रहा, इसलिए सदा अजेय धूल है, इसलिए सदा विजेय श्वास है।
- दीप जी , आपकी यह बात सही है कि कितने ही अदेह भाव से मित्रता की जाय , आग-भूसे के उदाहरण के समान ही अनुकूलता आने पर वह अक्सर दैहिक प्रेम में बदल जाती है।
- दीप अंधकार से निकल रहा , क्योंकि तम बिना सनेह जल रहा , जी रही सनेह मृत्यु जी रही , क्योंकि आदमी अदेह ढल रहा , इसलिए सदा अजेय धूल है , इसलिए सदा विजेय श्वास है।