अन्तरीय का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- इसके इतर अग्नि तीर्थ कुमारी अन्तरीय ( कन्याकुमारी) तीन समुद्रों से घिरी हुई पवित्र भूमि रामेश्वरम् प्रभाव क्षेत्र (सोमनाथ)श्री क्षेत्र नासीक, ब्रह्म क्षेत्र कुरूक्षेत्र, कमल क्षेत्र पुष्कर और पवित्र धाम श्रीबद्रीनारायण भी श्राद्धकर्म के लिए प्रस्सत भूमि है।
- इसके इतर अग्नि तीर्थ कुमारी अन्तरीय ( कन्याकुमारी ) तीन समुद्रों से घिरी हुई पवित्र भूमि रामेश्वरम् प्रभाव क्षेत्र ( सोमनाथ ) श्री क्षेत्र नासीक , ब्रह्म क्षेत्र कुरूक्षेत्र , कमल क्षेत्र पुष्कर और पवित्र धाम श्रीबद्रीनारायण भी श्राद्धकर्म के लिए प्रस्सत भूमि है।
- डार्विन का मतलब , बदलते पर्यावरण में रहने के लिए बेहतर अनुकूलता हासिल करने वाले जीवधारियों के अन्तरीय संरक्षण द्वारा “तत्काल, स्थानीय पर्यावरण के लिए बेहतर ढंग से अनुकूलित होना” था. यह अवधारणा कोई अनुलापिक अवधारणा नहीं है क्योंकि इसमें फिटनेस का एक स्वतंत्र मानदंड शामिल है.
- डार्विन का मतलब , बदलते पर्यावरण में रहने के लिए बेहतर अनुकूलता हासिल करने वाले जीवधारियों के अन्तरीय संरक्षण द्वारा “तत्काल, स्थानीय पर्यावरण के लिए बेहतर ढंग से अनुकूलित होना” था. यह अवधारणा कोई अनुलापिक अवधारणा नहीं है क्योंकि इसमें फिटनेस का एक स्वतंत्र मानदंड शामिल है.
- दूसरी ओर , अगर अन्तरीय प्रजननात्मक सफलता का नेतृत्व करने वाले पात्र पैतृक नहीं हैं तो कोई अर्थपूर्ण विकास नहीं होगा या न ही “स्वस्थतम की उत्तरजीविता” रहेगी: अगर प्रजननात्मक सफलता में होने वाला सुधार उन प्रवृत्तियों द्वारा हो जो पैतृक नहीं हैं तो इसकी कोई वजह नहीं है कि पीढ़ी दर पीढ़ी इन प्रवृत्तियों की आवृत्ति में वृद्धि हो.
- दूसरी ओर , अगर अन्तरीय प्रजननात्मक सफलता का नेतृत्व करने वाले पात्र पैतृक नहीं हैं तो कोई अर्थपूर्ण विकास नहीं होगा या न ही “स्वस्थतम की उत्तरजीविता” रहेगी: अगर प्रजननात्मक सफलता में होने वाला सुधार उन प्रवृत्तियों द्वारा हो जो पैतृक नहीं हैं तो इसकी कोई वजह नहीं है कि पीढ़ी दर पीढ़ी इन प्रवृत्तियों की आवृत्ति में वृद्धि हो.
- अपने अन्दर मैं या तो अनुभव करता हूँ कि मैं किसी बात का “ध्यान” कर रहा हूं , या किसी पदार्थ की प्राप्ति की मुझे “आशा” लग रही है या किसी विषय में मुझे “सन्देह” उत्पन हो रहा है या मुझ को अपने किसी कार्य के सम्बन्ध में “भय” उत्पन हो रहा है या अपने किसी मित्र का “स्मरण” करके मुझे “प्रसन्नता” हो रही है, या अपने किसी शारीरिक अथवा मानसिक “दु:ख” का अनुभव हो रहा है, इत्यादि इसी प्रकार की अनेक मानसिक अवस्थाओं में से कोई न कोई अवस्था इस समय मेरे अन्तरीय अवलोकन का विषय बन रही है.