असत्ता का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- किन्तु नकारात्मक लक्षणों ( नेति , नेति ) से हमें इस भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए कि ब्रह्म असत्ता है .
- नागार्जुन के मतानुसार वस्तु की परमार्थत : सत्ता का एक ' शाश्वत अन्त ' है तथा व्यवहारत : असत्ता दूसरा ' उच्छेद अन्त ' है।
- नागार्जुन के मतानुसार वस्तु की परमार्थत : सत्ता का एक ' शाश्वत अन्त ' है तथा व्यवहारत : असत्ता दूसरा ' उच्छेद अन्त ' है।
- आशय यह है कि नास्तिकता सीधे वेदों की प्रामाणिकता के प्रश्न से जुड़ा मसला है , न कि ईश्वर की सत्ता अथवा असत्ता से .
- {{ Menu }} {{ बौद्ध दर्शन }} == माध्यमिक दर्शन == {{ tocright }} ( शून्यवाद ) == परिभाषा == * सत्त्व ( सत्ता ) और असत्त्व ( असत्ता ) के मध्य में स्थित होना ' माध्यमिक ' शब्द का अर्थ है अर्थात सभी धर्म परमार्थत : ( सत्यत : ) सत नहीं हैं और संवृतित : ( व्यवहारत : ) असत भी नहीं हैं- ऐसी जिनकी मान्यता है , वे ' माध्यमिक ' कहलाते हैं।