अहरह का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- कविता की अंतिम पंक्तियां हैं- ‘ यह है नदी अपवित्र / अहरह बहती हुई कर्मनाशा / गंगा-जमुना हैं जिसके दो तीर।
- दो बार 1956 में नई-नई सृष्टि रचने में तत्पर कोटि-कोटि का चरण देते रहे अहरह स्निग्ध इंगित और मैं असम-अकर्मा पड़ा रहूँ चुपचाप ?
- इनकी भुजा में शक्ति है ये आर्य हैं भूगोल पर ये अवतरित देवांश हैं कुल , गोत्र , वर्गों से न लेते ब्याज जो आद्यंत अहरह जगमगाते हंस ये
- वृक्ष अपनी पत्तियों से गाता है अहरह एक हरा गान , आकाश लिखता है नक्षत्रों की झिलमिल में एक दीप्त वाक्य, पक्षी आँगन में बिखेर जाते हैं एक अज्ञात व्याकरण
- धक्का देने पर भी कुछ नहीं बोलते . "लोकनाथ के साथ अहरह खेलनेवाली लड़कीसुमित्रा लोकनाथ के लिए झाड़ू लगाकर जगह साफ करती, आसन बिछाती, खेल का सामानलाती, पूजा के लिए फूल, बेलपत्ती, दूर्बा लाती.
- वही थोड़ा-सा आदमी जिसे ख़बर है कि वृक्ष अपनी पत्तियों से गाता है अहरह एक हरा गान , आकाश लिखता है नक्षत्रों की झिलमिल में एक दीप्त वाक्य, पक्षी आँगन में बिखेर जाते हैं एक अज्ञात व्याकरण
- उपर्युक्त आत्मनेपद की भीतरी मंशा से यह स्पष्ट हो जाता है कि मत्त जी ने ‘ नागमति यह दुनिया धंधा ' की अहरह आपाधापी की जद्दोजहहद को निभाते हुए भी अपने लक्ष्य को कभी विस्मृत नहीं होने दिया।
- मृत्यु मुद्रित प्रेम उनका चला दुर्गम मार्ग पर से पिताओं का क्रोध भीषण बन धधकता रहा अहरह , जोकि केवल मृत्यु उनकी, उस सुघर सन्तान की ही, अन्त में थी रोक पाई, यही दो घण्टे हमारे मंच का है खेल।
- गुरुदेव रवीन्द्रनाथ के स्वागत गान के दूसरे चरण का सटीक विश्लेषण है अहरह तव आव्हान प्रचारित , सुनि तव उदार वाणी हिन्दू बौद्ध सिख ईसाई, मुसलमान क्रिस्तानी पूरब पश्चिम आसे, तव सिंहासन पासे, संकट दु:ख त्राता जन गण मंगल दायक जय हे भारत भाग्य विधाता
- वही थोड़ा-सा आदमी जिसे ख़बर है कि वृक्ष अपनी पत्तियों से गाता है अहरह एक हरा गान , आकाश लिखता है नक्षत्रों की झिलमिल में एक दीप्त वाक्य, पक्षी आँगन में बिखेर जाते हैं एक अज्ञात व्याकरण वही थोड़ा-सा आदमी - अगर बच सका तो वही बचेगा।