आंवां का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- अपनी चालीस सालों की रचना-यात्रा में ' आंवां ‘ , ' एक ज़मीन अपनी ‘ और ' गिलिगडु ‘ जैसे तीन चर्चित उपन्यास , तेरह कहानी-संग्रह , तीन बाल उपन्यास , चार बालकथा-संग्रह , दो वैचारिक निबंध संग्रह और छह संपादित पुस्तकें उनकी प्रकाशित हो चुकी हैं।
- चित्राजी को साहित्य में उनके रचनात्मक अवदान और उनकी सामाजिक सेवाओं के लिए अब तक अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है , जिनमें बहुचर्चित उपन्यास ' आंवां ‘ पर सहस्राब्दि का पहला अन्तर्राष्ट्रीय ' इन्दु शर्मा कथा सम्मान ‘ लन्दन से तथा बिड़ला फाउण्डेशन का ' व्यास सम्मान ‘ हाल ही में मिला है।
- चित्राजी को साहित्य में उनके रचनात्मक अवदान और उनकी सामाजिक सेवाओं के लिए अब तक अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है , जिनमें बहुचर्चित उपन्यास ' आंवां ‘ पर सहस्राब्दि का पहला अन्तर्राष्ट्रीय ' इन्दु शर्मा कथा सम्मान ‘ लन्दन से तथा बिड़ला फाउण्डेशन का ' व्यास सम्मान ‘ हाल ही में मिला है।
- जैसे जगदम्बा प्रसाद दीक्षित का मुर्दाघर , पानू खोलिया का सत्तर पार के शिखर, जगदीश चंद का कभी न छोड़ें खेत, श्रीलाल शुक्ल का राग दरबारी, हिमांशु जोशी का कगार की आग, ज्ञान चतुर्वेदी का बारामासी, चित्रा मुद्गल का आंवां, संजीव का जंगल जहां शुरू होता है, सूरज प्रकाश का देस बिराना, नरेन्द कोहली की दीक्षा, विभूति नारायण राय का तबादला मेरी प्रिय पुस्तकों में से हैं।
- वो सबको खुश करके जातीं और जाते जाते वो नेग में मिले चावलों के दानों से अपनी मुठ्टी भर लेतीं और गातीं - तेरे कोठे उत्ते मोर तेरे मुंडा जम्मे होर साल नूं फेर आंवां ( तेरी छत पर मोर है , तेरे एक बेटा और हो और अगले साल मैं फिर बधाई गाने आऊं ) वो कईं बार पूरे सुर ताल में अपनी मंडली के साथ यही लाईन गातीं जातीं और चावल के दाने घर की तरफ डालती जातीं ।
- चित्रा जी ने ' आंवां ‘ , ' अपनी एक ज़मीन ‘ और ' गिलीगडू ‘ जैसी कृतियों के माध्यम से हिन्दी के कथा-साहित्य में और विशेषतः स्त्री-विमर्श और उपेक्षित बुजुर्गों की समस्या के समाधान में निश्चय ही अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई है , इन सभी रचनात्मक कार्यों , मीडिया में उनकी सक्रिय भागीदारी और उनके बहुआयामी अनुभव को ध्यान में रखते हुए पिछले दिनों ( मार्च , २ ०० ५ में ) जब वे जयपुर आईं , तो उनसे यह बातचीत आयोजित की गई , जो यहाँ अविकल रूप में प्रस्तुत की जा रही है :
- चित्रा जी ने ' आंवां ‘ , ' अपनी एक ज़मीन ‘ और ' गिलीगडू ‘ जैसी कृतियों के माध्यम से हिन्दी के कथा-साहित्य में और विशेषतः स्त्री-विमर्श और उपेक्षित बुजुर्गों की समस्या के समाधान में निश्चय ही अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई है , इन सभी रचनात्मक कार्यों , मीडिया में उनकी सक्रिय भागीदारी और उनके बहुआयामी अनुभव को ध्यान में रखते हुए पिछले दिनों ( मार्च , २ ०० ५ में ) जब वे जयपुर आईं , तो उनसे यह बातचीत आयोजित की गई , जो यहाँ अविकल रूप में प्रस्तुत की जा रही है :