आसाइश का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- बेशक जो अल्लाह पर झूट बांधते है उनका भला न होगा { 116 } थोड़ा बरतना है ( 16 ) ( 16 ) और दुनिया की कुछ ही दिनों की आसाइश है जो बाक़ी रहने वाली नहीं .
- ऐसा भी न करो यह एहतिराम उन बीबियों का इसलिये है कि जब हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने उन्हें इख़्तियार दिया था तो उन्होंने अल्लाह और रसूल को इख़्तियार किया और दुनिया की आसाइश को ठुकरा दिया चुनांन्चे रसूले करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने उन्हीं पर इक्तिफ़ा फ़रमाया और आख़िर तक यही बीबियाँ हुज़ूर की ख़िदमत में रहीं .
- “वर्ल्ड न्यूज़ इज़ द नाविल पिपल वॉंट टू रीड , ” सुनते ही लेखक की कांख और पीठ के नामौज़ूद बाल सुलगने लगते हैं, उंगलियों के पोर पर बैठी नाविल की तमहीद (प्रस्तावना) मुमताज़ और धरमिंदर के पीछे-पीछे झील के उस पार पहुंच जाती है, आसाइश (आराम) जाकर रोज़े पर बैठ जाती है, आलिम औ' फ़ाज़िलपना दोज़ख़ (नरक) को हासिल होते हैं!
- 62 . पूरा आलिम व दाना ( सम्पूर्ण ज्ञानी एवं विध्दान ) वह है जो लोगों को रहमते खुदा ( खुदा की दया ) से मायुस ( निराश ) और उसकी तरफ से हासिल ( प्राप्त ) होने वाली आसाइश व राहत ( सुविधायें एवं विलास ) से नाउम्मीद ( निराश ) न करें , और न उन्हें अल्लाह के अज़ाब ( दण्ड ) से बिलकुल मुत्मइन ( निश्चिन्त ) कर दे।
- आज की तरक़्क़ी याफ़ता दुनिया में जिस क़दर आसाइश व आराम के वसायल मुहैय्या हैं उसी क़दर सुकून व इतमीनान का फ़ोक़दान है अगर एक तरफ़ सरमाया , औलाद , इल्म , हुनर वग़ैरह में इज़ाफ़ा होता है तो दूसरी जानिब उन्ही तमाम चीज़ों के ज़रिये बे चैनी व इज़तेराब में भी इज़ाफ़ा होता है सुकून व चैन , राहत व इतमीनान ऐसे अल्फ़ाज़ हैं जिन्हे सुनने के लिये समाअत तिशना रहती है।
- ऐ अल्लाह ! हमें भी उन के साथ ख़ुश गवार व पाकीज़ा ज़िन्दगी ( सुखद व पवित्र जीवन ) और मंज़िले नेमात में यकजा ( वर्दानों की श्रेणी में एकत्र ) कर और मर्ग़ूब व दिलपसन्द ख़्वाहिशों और लज़्ज़तों ( रुचिकर व मनोवांछित इच्छाओं एंव स्वादों ) और आसाइश व फ़ारिग़ुलबाली ( सुख समृद्धि ) और शरफ़ व करामत के तोह्फ़ों ( प्रतिष्ठा एंव चमत्कार के उपहारों ) में शरीक ( सम्मिलित ) बना।