आह भरना का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- ऐसे ही एक बार वह बिलकुल चरम क्षणों में बुदबुदाई , ” देख रही हूं तुम्हारे नसीब में मेरे लिए आह भरना ही लिखा है।
- पुरुष ना तो आह भरना छोड़ सकता है ना ही यह कल्पना करना कि उसे कोई और लड़की , अपने टाइप की काहें नहीं मिली .
- उदाहरण के लिए सड़क Butyrskiy वैल स्ट्रीट , पीपुल्स मिलिशिया , क्षेत्र शेतकरी Zastava Nikitsky गेट , बड़ा पत्थर पुल , आह भरना के पुल , आदि ( स्रोत : .
- उदाहरण के लिए सड़क Butyrskiy वैल स्ट्रीट , पीपुल्स मिलिशिया , क्षेत्र शेतकरी Zastava Nikitsky गेट , बड़ा पत्थर पुल , आह भरना के पुल , आदि ( स्रोत : .
- कालिखों की राह में दौड़ते नूर के टुकड़ेबहसियाने रंग बिरंगे चमकते बुझतेउनके साथ हूँ जो रुके टिमटिमाते सुनतेचिल्ल पों में फुसफुसाते आगे सरकतेगोया कि हैं अभिशप्त पीछे छूटने कोइनका काम बस आह भरना औ ' सरकना।
- उनका मार्ग चाहे ऐसे भग्नावशेषों से भर गया हो जिनके पुनर्निर्माण में समय लगेगा पर ऐसी अडिग शिलाएँ नहीं है , जिनको देख-देख कर उन्हें निष्फल क्रोध में दाँत पीसना पड़े या निराश पराजय में आह भरना पड़े।
- हक़ तो जीने का नहीं है कोई , फिर भी जीता ही कहीं है कोई ! आह भरना भी जहां होता गुनाह , रोया जा-के वहीं है कोई ! मौत की मिलके दुआएं मांगें , अब इलाज इसका नहीं है कोई ! आएगा वो मेरी मैयत पे ज़रूर , कब कहीं आता युंहीं है कोई ! किसको ढूंढे है नज़र , सहरा में , मिलता कब “ तनहा ” कहीं है कोई !
- हक़ तो जीने का नहीं है कोई , फिर भी जीता ही कहीं है कोई ! आह भरना भी जहां होता गुनाह , रोया जा-के वहीं है कोई ! मौत की मिलके दुआएं मांगें , अब इलाज इसका नहीं है कोई ! आएगा वो मेरी मैयत पे ज़रूर , कब कहीं आता युंहीं है कोई ! किसको ढूंढे है नज़र , सहरा में , मिलता कब “ तनहा ” कहीं है कोई !
- चुपचाप आह भरना , ऐसे सवालों पर क्या ज़िरह करना, लिखना भाषा के इकतरफा मुहब्बत में डूबे लुटते रहने का फसाना भर हो तो आदमी बोले, बताये, फंसनी सुलझाये, मगर हुज़ूर, यहां तो जाने कैसी रोपनी और कैसी कटनियों के क्या-कितने मल्टीपल एंगल हैं, भागने-भगाने और फिर रहते-रहते किसी मद्धिम, गहरे तान में गुम जाने की सुसुप्त, गुप्त एक और ही कहानी है, कभी थोड़ा-थोड़ा हमें समझ आता है, पेंचोख़म ज़्यादा तो अभी खुद तक को भी ‘जनवानी' है!
- वो यक़ीनन ही हर एक दिल में खुशी भर जाएगा जो अँधेरी बस्तियों में रौशनी कर जाएगा दौर ज़ुल्मों का अगर रोका गया न दोस्तो आदमी ख़ुद आदमी के नाम से डर जाएगा शर्म यूँ नीलाम होने आ गई बाज़ार में शर्म गर बाकी रही तो आदमी मर जाएगा लूटता फिरता है सबको तीरगी के नाम पर देखना वो रौशनी के नाम से डर जाएगा दिल दुखाना , आह भरना और रोना दोस्तो 'मीत' सा आशिक जहाँ में जीते जी मर जाएगा।