ईहामृग का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- सत्य और मिथ्या के बीच नारी मन की अन्तर्व्यथा ' ईहामृग ' ।
- सत्य और मिथ्या के बीच नारी मन की अन्तर्व्यथा ' ईहामृग ' ।
- धनंजय के अनुसार ईहामृग का कथानक मिश्रित ( कुछ ऐतिहासिक और कुछ उत्पाद्य) होता है।
- ईहामृग के पृष्ठाधार के ताने-बाने को इतिहास के सहारे बुनने क प्रयत्न किया गया है।
- ईहामृग के पृष्ठाधार के ताने-बाने को इतिहास के सहारे बुनने क प्रयत्न किया गया है।
- रागात्मक संबंधों के माध्यम से इन विचार-बिंदुओं की लयबद्ध काव्यात्मक प्रस्तुति है ' ईहामृग ' ।
- रागात्मक संबंधों के माध्यम से इन विचार-बिंदुओं की लयबद्ध काव्यात्मक प्रस्तुति है ' ईहामृग ' ।
- रूपक के दस भेद ये हैं-नाटक प्रकरण , भाण, व्यायोग, समवकार, डिम, ईहामृग, अंक, वीथी और प्रहसन।
- अग्निपुराण में दृश्य काव्य या रूपक के २७ भेद कहे गए हैं- नाटक , प्रकरण, डिम, ईहामृग, समवकार,
- रूपक के दस भेद हैं- रूपक , नाटक, प्रकरण, भाण, व्यायोग, समवकार, ड़िम, ईहामृग, अंकवीथी और प्रहसन ।