गोचरी का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- जैनों के सां स्कृतिक इतिहास में हमें ज्ञात होता है कि पूर्व काल में जैन मुनि अरण्य में ही निवास करते थे , केवल भिक्षार्थ- गोचरी के लिए ही नगर में पदार्पण करते थे।
- धनु राशि वालों के लिए शनि का गोचरी भ्रमण द्वितीयेश व तृतीयेश होकर एकादश भाव से भ्रमण करने से धन कुटुंब , वाणी के प्रभाव से लाभ मिलेगा , धन की बचत भी कर पाएंगे।
- जिसमें भोजन व्यवस्था के लिए बसंत बोरड़ , मोहनलाल भूतोडिया, प्रचार व प्रसार के लिए अजय चोरडिया, सेवा व चिकित्सा के लिए प्रदीप बैद व कमल डोसी, सभा भवन व्यवस्था के लिए नवरतन गिडिया व चंदनमल कोठारी, साधु संतों की गोचरी व्यवस्था सुशील लूणिया व आवास व्यवस्था के लिए संजय भूतोडिया और पुखराज बाफना को प्रभारी बनाया गया है।
- महीने के उपवास के बाद आहार लेने के लिये निकलने से पहले ( गोचरी जाने से पहले) प्रण ( जैन शास्त्र के अनुसार -अभिग्रह) किया था कि एक स्त्री जो बेड़ियों में जकड़ी हुई होगी, खाने के लिए सूप (सूपड़ी) में उड़द के बाकले होंगे, जो आधी घर और आधी बाहर (यानि देहरी पर) खड़ी होगी और जिसकी आँखों में आँसू होंगे उसके हाथ से आहार लूंगा।
- दरअसल भगवान महावीर ने छ : महीने के उपवास के बाद आहार लेने के लिये निकलने से पहले ( गोचरी जाने से पहले ) प्रण ( जैन शास्त्र के अनुसार -अभिग्रह ) किया था कि एक स्त्री जो बेड़ियों में जकड़ी हुई होगी , खाने के लिए सूप ( सूपड़ी ) में उड़द के बाकले होंगे , जो आधी घर और आधी बाहर ( यानि देहरी पर ) खड़ी होगी और जिसकी आँखों में आँसू होंगे उसके हाथ से आहार लूंगा।