×

तूण का अर्थ

तूण अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. इनमें पैशाची का विशेषता शब्द के मध्य में तृतीय चतुर्थ वर्णो के स्थान पर प्रथम तथा द्वितीय का आदेश , ण के स्थान पर न्, ज्ञ्, न्य के स्थान पर ञ्ञ तथा त्वा के स्थान पर तूण बतलाई गई है, और मागधी की ष्, स्, के स्थान पर क्ष ज् के स्थान पर य्, क्ष के स्थान पर एक अहं के स्थान पर हके, हगे व अहके, तथा अकारांत कर्ता कारक एकवचन के अंत में ए कही गई हैं।
  2. इनमें पैशाची का विशेषता शब्द के मध्य में तृतीय चतुर्थ वर्णो के स्थान पर प्रथम तथा द्वितीय का आदेश , ण के स्थान पर न्, ज्ञ्, न्य के स्थान पर ञ्ञ तथा त्वा के स्थान पर तूण बतलाई गई है, और मागधी की ष्, स्, के स्थान पर क्ष ज् के स्थान पर य्, क्ष के स्थान पर एक अहं के स्थान पर हके, हगे व अहके, तथा अकारांत कर्ता कारक एकवचन के अंत में ए कही गई हैं।
  3. राम का विषण्णानन देखते हुए कुछ क्षण , “हे सखा” विभीषण बोले “आज प्रसन्न वदन वह नहीं देखकर जिसे समग्र वीर वानर भल्लुक विगत-श्रम हो पाते जीवन निर्जर, रघुवीर, तीर सब वही तूण में है रक्षित, है वही वक्ष, रणकुशल हस्त, बल वही अमित, हैं वही सुमित्रानन्दन मेघनादजित् रण, हैं वही भल्लपति, वानरेन्द्र सुग्रीव प्रमन, ताराकुमार भी वही महाबल श्वेत धीर, अप्रतिभट वही एक अर्बुद सम महावीर हैं वही दक्ष सेनानायक है वही समर, फिर कैसे असमय हुआ उदय यह भाव प्रहर।
  4. राम का विषण्णानन देखते हुए कुछ क्षण , “हे सखा” विभीषण बोले “आज प्रसन्न वदन वह नहीं देखकर जिसे समग्र वीर वानर भल्लुक विगत-श्रम हो पाते जीवन निर्जर, रघुवीर, तीर सब वही तूण में हैं रक्षित, है वही वक्ष, रणकुशल हस्त, बल वही अमित, हैं वही सुमित्रानन्दन मेघनादजित् रण, हैं वही भल्लपति, वानरेन्द्र सुग्रीव प्रमन, ताराकुमार भी वही महाबल श्वेत धीर, अप्रतिभट वही एक अर्बुद सम महावीर हैं वही दक्ष सेनानायक है वही समर, फिर कैसे असमय हुआ उदय यह भाव प्रहर।
  5. राम का विषण्णानन देखते हुए कुछ क्षण , “ हे सखा ” विभीषण बोले ” आज प्रसन्न वदन वह नहीं देखकर जिसे समग्र वीर वानर भल्लुक विगत-श्रम हो पाते जीवन निर्जर , रघुवीर , तीर सब वही तूण में हैं रक्षित , है वही वक्ष , रणकुशल हस्त , बल वही अमित , हैं वही सुमित्रानन्दन मेघनादजित् रण , हैं वही भल्लपति , वानरेन्द्र सुग्रीव प्रमन , ताराकुमार भी वही महाबल श्वेत धीर , अप्रतिभट वही एक अर्बुद सम महावीर हैं वही दक्ष सेनानायक है वही समर , फिर कैसे असमय हुआ उदय यह भाव प्रहर।
अधिक:   पिछला  आगे


PC संस्करण
English


Copyright © 2023 WordTech Co.