देव ऋण का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- इसी तरह पितृ ऋण , ऋषि ऋण , एवं देव ऋण के।
- * हवन-पूजन करने से देवयज्ञ होने पर देव ऋण पूर्ण होता है।
- * हवन-पूजन करने से देवयज्ञ होने पर देव ऋण पूर्ण होता है।
- ( २ ) देव ऋण से छुटकारा यज्ञ द्वारा होता है ।।
- देव ऋण अर्थात देवताओं के ऋण से भी हम पीड़ित होते हैं।
- मनुश्य पर मुख्य रूप से तीन ऋण होते है 1 . देव ऋण 2.
- मनुश्य पर मुख्य रूप से तीन ऋण होते है 1 . देव ऋण 2.
- देव ऋण : यानि यज्ञ आदि कार्यों द्वारा देवताओं को प्रशन्न एवं पुष्ट करना।
- ये तीन ऋण हैं : - 1. देव ऋण, 2. ऋषि ऋण और 3. पितृ ऋण ।
- शास्त्रों में मनुष्य के तीन ऋण कहे गए हैं- देव ऋण , गुरु ऋण व पितृ ऋण।