धेली का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- तो जाते हुए तेरी जेब क्यों भर जाऊं ? और वह अकेले ही अपन जोर पर जीते हुए , सारी उम्र कहती रही - ” काहे की चिंता है बीबी ! धेली पल्ले से बंधी हुई है , आड़े वक़्त में भुनवा लूँगी ...
- तो जाते हुए तेरी जेब क्यों भर जाऊं ? और वह अकेले ही अपन जोर पर जीते हुए , सारी उम्र कहती रही - ” काहे की चिंता है बीबी ! धेली पल्ले से बंधी हुई है , आड़े वक़्त में भुनवा लूँगी ...
- अश्लीलता समाज के उस गठन में है जहाँ घर का निर्माण आधी औरत की बुनियाद पर टिका हुआ है . ...आधी औरत -एक धेली ,सिर्फ काम वासना की पूर्ति का साधन अमृता प्रीतम ने समाज की इसी कुव्यवस्था को अपनी रचना में दर्शाया है ..
- धन्नो का दर्द उस औरत की कल्पना -जिसके तन को मन नसीब हुआ हो और जिस सपने की पूर्ति के जोड़ तोड़ के लिए वह अपनी सारी जमीन गांव की पाठशाला के नाम कर देती है -भविष्य की किसी समझ बूझ के नाम , जब औरत को अपने बदनकी धेली भुना कर नहीं जीना पड़ेगा और इस तरह से रोटी नहीं खानी पड़ेगी
- . इस कहानी का स्थान कोई भी गांव हो सकता है ,पर समय वह है जब चिट्टा रूपया चांदी का होता था ,गांव की एक अधेड़ उम्र की औरत धन्नो कहानी की मुख्य पात्री है ..समाज की मुहं फट चेतना का प्रतीक ..उसके शब्दों में “औरत को तो खुदा ने शुरू से ही धेली बनाया है रूपया साबुत तो कोई कर्मों वाली होती है जिसे मन का मर्द मिल जाये ..
- यह धेली जो पल्ले बंधी है वह धर्मराज को दे कर कहूँगी ले भुना ले और हिसाब चुकता कर “ . ..सदाचार समझने वाला समाज धन्नो की बातें सुन कर कानों में उंगिलयां दे देता है और धन्नो के मरने के बाद भी उसकी वसीयत पढ़ कर भी अश्लीलता के अर्थ नहीं जान सकता ...धन्नो के अपनी जमीन गांव की पाठशाला के नाम लिख दी है और साथ में एक चाह भी ..
- अगर पल्ले से बंधी हुई धेली भुनवा कर ही रोटी खानी है . तो जाते हुए तेरी जेब क्यों भर जाऊं ?और वह अकेले ही अपन जोर पर जीते हुए ,सारी उम्र कहती रही -“काहे की चिंता है बीबी ! धेली पल्ले से बंधी हुई है ,आड़े वक़्त में भुनवा लूँगी ...”धन्नो के पास कुछ जमीन है जो एक बार किसी मुरब्बे वाले ने उस पर रीझ कर ,अपने पुत्रों से छिपा कर उसके नाम कर दी थी अलग घर भी बनवा दिया था और जब तक जिंदा रहा उसकी खैर खबर लेता रहा था ..
- अगर पल्ले से बंधी हुई धेली भुनवा कर ही रोटी खानी है . तो जाते हुए तेरी जेब क्यों भर जाऊं ?और वह अकेले ही अपन जोर पर जीते हुए ,सारी उम्र कहती रही -“काहे की चिंता है बीबी ! धेली पल्ले से बंधी हुई है ,आड़े वक़्त में भुनवा लूँगी ...”धन्नो के पास कुछ जमीन है जो एक बार किसी मुरब्बे वाले ने उस पर रीझ कर ,अपने पुत्रों से छिपा कर उसके नाम कर दी थी अलग घर भी बनवा दिया था और जब तक जिंदा रहा उसकी खैर खबर लेता रहा था ..
- अगर पल्ले से बंधी हुई धेली भुनवा कर ही रोटी खानी है . तो जाते हुए तेरी जेब क्यों भर जाऊं ?और वह अकेले ही अपन जोर पर जीते हुए ,सारी उम्र कहती रही -“काहे की चिंता है बीबी ! धेली पल्ले से बंधी हुई है ,आड़े वक़्त में भुनवा लूँगी ...”धन्नो के पास कुछ जमीन है जो एक बार किसी मुरब्बे वाले ने उस पर रीझ कर ,अपने पुत्रों से छिपा कर उसके नाम कर दी थी अलग घर भी बनवा दिया था और जब तक जिंदा रहा उसकी खैर खबर लेता रहा था ..
- अगर पल्ले से बंधी हुई धेली भुनवा कर ही रोटी खानी है . तो जाते हुए तेरी जेब क्यों भर जाऊं ?और वह अकेले ही अपन जोर पर जीते हुए ,सारी उम्र कहती रही -“काहे की चिंता है बीबी ! धेली पल्ले से बंधी हुई है ,आड़े वक़्त में भुनवा लूँगी ...” धन्नो के पास कुछ जमीन है जो एक बार किसी मुरब्बे वाले ने उस पर रीझ कर ,अपने पुत्रों से छिपा कर उसके नाम कर दी थी अलग घर भी बनवा दिया था और जब तक जिंदा रहा उसकी खैर खबर लेता रहा था ..