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पुंगव का अर्थ

पुंगव अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. नर पुंगव ! पिशाच और भूत वैताल तक भी ! भूत भावन भी हैं तो भूत भंजक भी ! परम ज्ञानी हैं, केवल ज्ञानी हैं तो अपने ज्ञानदत्त जी भी हैं !
  2. विश्ववन्दनीय सन्त शिरोमणि परम् पूज्य आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम् शिष्य दार्शनिक एवं आध्याित्मक सन्तए तीर्थक्षेत्र-जीणोZद्धारक आगम यथार्थ व निभीZक उद्घोषक मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज इस क्षेत्र के प्रेरणास्त्रोत हैं।
  3. नर पुंगव ! पिशाच और भूत वैताल तक भी ! भूत भावन भी हैं तो भूत भंजक भी ! परम ज्ञानी हैं , केवल ज्ञानी हैं तो अपने ज्ञानदत्त जी भी हैं !
  4. आचार्य विद्या सागर के शिष्य मुनि पुंगव सुधासागर महाराज , क्षुल्लक गंभीर सागर, धैर्य सगार महाराज की प्रेरणा से 30 जून 1995 को 327 बीघा जमीन पर श्री दिगंबर जैन ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र की स्थापना हुई।
  5. हे नर पुंगव तुम ऐसा क्या अमृत रस पीते हो ? किस मिट्टी के बने हो ?हम में से हर आदमी यदि इसी प्रकार का प्रयास करे तो आमिर नहीं तो सलमान तो बन जाएगा ।
  6. ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र के प्रेरणास्त्रोत विश्ववन्दनीय सन्त शिरोमणि परम् पूज्य आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम् शिष्य दार्शनिक एवं आध्याित्मक सन्तए तीर्थक्षेत्र-जीणोZद्धारक आगम यथार्थ व निभीZक उद्घोषक मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज इस क्षेत्र के प्रेरणास्त्रोत हैं।
  7. सठियाने का आरोप लगायेगें उनके लिए बता दूं कि ब्लॉगर पुंगव ( श्रेष्ठ ) अनूप शुक्ल जी मुझे पहले ही चिर युवा की संज्ञा/विशेषण दे चुके हैं ....और अभी तो मैं पचपन का भी नहीं हुआ ...पचपन मानें बचपन ! :)&
  8. मैं जानता हूँ मेरे कुछ मित्र भी जो इसी कटेगरी के हैं यह पढ़कर मुझ पर सठियाने का आरोप लगायेगें उनके लिए बता दूं कि ब्लॉगर पुंगव ( श्रेष्ठ ) अनूप शुक्ल जी मुझे पहले ही चिर युवा की संज्ञा / विशेषण दे चुके हैं ....
  9. आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि पुंगव श्री सुधासागर महाराज जी का वर्षायोग 2012 धार्मिक नगर ललितपुर ( उत्तर प्रदेश) में क्षेत्रपाल जी मंदिर में 20 वर्ष बाद हो रहा है | इसके पूर्व में सन 1991 एवं 1993 में चातुर्मास हो चूका है
  10. उस काल में जोधपुर नरेश मानसिंह तथा मेवाड़ नरेश भीमसिंह हिन्दू नरेशों के गौरव थे किंतु विधि का विधान ऐसा था कि ये वीर पुंगव भी राजपूताने की रक्षा न कर सके और इन दोनों ही नरेशों को अपनी रक्षा के लिये अंग्रेजों का मुँह ताकना पड़ा।
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