वृष्य का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- यथा-अपत्यकारी षष्टिकादि गुटिका , अपत्यकरःस्वरसः, वृष्य घृतः, वृष्योघिसर प्रयोग, वृष्य पिप्पली योग, वृष्य पायस योग, शतावरी घृत, अपत्यकर घृतः वृष्योत्कारिका, वृष्य गुटिका आदि योग हैं (च.
- यथा-अपत्यकारी षष्टिकादि गुटिका , अपत्यकरःस्वरसः, वृष्य घृतः, वृष्योघिसर प्रयोग, वृष्य पिप्पली योग, वृष्य पायस योग, शतावरी घृत, अपत्यकर घृतः वृष्योत्कारिका, वृष्य गुटिका आदि योग हैं (च.
- यथा-अपत्यकारी षष्टिकादि गुटिका , अपत्यकरःस्वरसः, वृष्य घृतः, वृष्योघिसर प्रयोग, वृष्य पिप्पली योग, वृष्य पायस योग, शतावरी घृत, अपत्यकर घृतः वृष्योत्कारिका, वृष्य गुटिका आदि योग हैं (च.
- प्रश्न : वृष्य और शुक्रल किसे कहते हैं ? उत्तर : जो पदार्थ वीर्यवर्द्धक और पौष्टिक हों उसे 'वृष्य' कहते हैं, जैसे उड़द, कौंच के बीज।
- प्रश्न : वृष्य और शुक्रल किसे कहते हैं ? उत्तर : जो पदार्थ वीर्यवर्द्धक और पौष्टिक हों उसे 'वृष्य' कहते हैं, जैसे उड़द, कौंच के बीज।
- प्रश्न : वृष्य और शुक्रल किसे कहते हैं ? उत्तर : जो पदार्थ वीर्यवर्द्धक और पौष्टिक हों उसे 'वृष्य' कहते हैं, जैसे उड़द, कौंच के बीज।
- पत्र खंडित और फ़ुल पीले रंग के आते हैं , फ़ल कंटक युक्त होते हैं ! यह शीतवीर्य, मुत्रविरेचक, बस्तिशोधक, अग्निदीपक, वृष्य, तथा पुष्टिकारक होता है ।
- पत्र खंडित और फ़ुल पीले रंग के आते हैं , फ़ल कंटक युक्त होते हैं ! यह शीतवीर्य, मुत्रविरेचक, बस्तिशोधक, अग्निदीपक, वृष्य, तथा पुष्टिकारक होता है ।
- गुण : यह स्वाद में चरपरी, तीक्ष्ण, कड़वी, रुचिकर, मूत्रल, दीपन, पाचन, हल्की, वृष्य, ऊष्णवीर्य और हृदयरोग, कफ वात तथा अंधत्व को दूर करने वाली होती है।
- इसके औषधीय गुण “ छिलिहिण्डः परंवृष्य कफघ्नः पवनाह्वयः ” अर्थात अतयन्त वृष्य ( वीर्यवर्धक ) , कफनाशक , तथा वातनाशक होने के कारण आयुर्वेद में इसका अत्यन्त अनुकूल गुण प्रभाव माना गया है।