शूर्प का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- श्री गणेश का स्वरूप : अरुणवण्र् ा , एकदंत , गजमुख , लंबोदर , रक्त ( लाल ) वस्त्र , शूर्प कर्ण , चतुर्भुज , त्रिपुंड तिलक एवं मूषकवाहन- यह इनका आगमोक्त स्वरूप है।
- श्री गणेश का स्वरूप : अरुणवण्र् ा , एकदंत , गजमुख , लंबोदर , रक्त ( लाल ) वस्त्र , शूर्प कर्ण , चतुर्भुज , त्रिपुंड तिलक एवं मूषकवाहन- यह इनका आगमोक्त स्वरूप है।
- ध्यान मंत्र- ' सृष्टि के प्रारंभकाल में जो प्रकट हुए हैं, जो इस जगत के परमकारण हैं, परम पुरुष गणेशजी की चार भुजाएँ हैं, वे गजवदन होने से उनके दोनों कान शूर्प आकार के हैं, उनका केवल एक दाँत है।
- ब्राह्मण ग्रन्थों व श्रौत ग्रन्थों में इषीका-निर्मित शूर्प / छाज का उल्लेख आता है जिसमें करम्भ पात्र रखकर यजमान और यजमान-पत्नी क्रमशः उत्तरवेदी और दक्षिण वेदी पर आहुति देते हैं ( आपस्तम्ब श्रौत सूत्र ८ . ६ . २ ३ , बौधायन श्रौत सूत्र ५ . ५ . ५ , ५ . ५ . १ ६ , ५ . ७ . ९ , ५ . ८ . ५ , शतपथ ब्राह्मण १ . १ . ४ . १ ९ आदि ) ।