श्रद्धारहित का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- देने के बाद पश्चात्ताप होना , अपात्र को देना, और श्रद्धारहित देना - इनसे दान नष्ट हो जाता है ।
- हे परंतप ! इस उपर्युक्त धर्म में श्रद्धारहित पुरुष मुझको न प्राप्त होकर मृत्युरूप संसारचक्र में भ्रमण करते रहते हैं।
- भावार्थ : हे परंतप! इस उपयुक्त धर्म में श्रद्धारहित पुरुष मुझको न प्राप्त होकर मृत्युरूप संसार चक्र में भ्रमण करते रहते हैं॥3॥
- नायं लोकोऽस्ति न परो न सुखं संशयात्मनः ॥ भावार्थ : विवेकहीन और श्रद्धारहित संशययुक्त मनुष्य परमार्थ से अवश्य भ्रष्ट हो जाता है।
- अप्राप्य मां निवर्तन्ते मृत्युसंसारवर्त्मनि ॥ भावार्थ : हे परंतप ! इस उपयुक्त धर्म में श्रद्धारहित पुरुष मुझको न प्राप्त होकर मृत्युरूप संसार चक्र में भ्रमण करते रहते हैं॥ 3 ॥ मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमूर्तिना ।
- इतना ही नहीं , अग्निसे ये काम तो श्रद्धारहित व्यक्ति भी ले सकता है , पर वैदिक मन्त्र और परलोकमें श्रद्धा रखनेवाला मनुष्य तो वैदिक मन्त्रोंसे श्रद्धापूर्वक विधिसहित अग्निमें आहुति देकर स्वर्गप्राप्ति भी कर सकता है और जो भगवान् की आज्ञा मानकर निष्कामभावसे अग्निमें आहुति देकर यज्ञ करता है , वह तो अग्निसे भगवान् की प्राप्ति भी कर सकता है ।
- और वह सूक्ष्म होने से अविज्ञेय ( जैसे सूर्य की किरणों में स्थित हुआ जल सूक्ष्म होने से साधारण मनुष्यों के जानने में नहीं आता है , वैसे ही सर्वव्यापी परमात्मा भी सूक्ष्म होने से साधारण मनुष्यों के जानने में नहीं आता है ) है तथा अति समीप में ( वह परमात्मा सर्वत्र परिपूर्ण और सबका आत्मा होने से अत्यन्त समीप है ) और दूर में ( श्रद्धारहित , अज्ञानी पुरुषों के लिए न जानने के कारण बहुत दूर है ) भी स्थित वही है॥ 15 ॥ अविभक्तं च भूतेषु विभक्तमिव च स्थितम् ।