सुकृती का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- भावार्थ : - सुकृती ( पुण्यात्मा ) जनों के , साधुओं के और श्री रामनाम के गुणों का गान ही विचित्र जल पक्षियों के समान है।
- गीता का कहना है कि , ' चार प्रकार के सुकृती - पुण्यात्मा - लोग मुझमें - भगवान में - मन लगाते , प्रेम करते हैं , वे हैं दुखिया या कष्ट में पड़े हुए , ज्ञान की इच्छावाले , धन-संपत्ति चाहने वाले और ज्ञानी।
- तौ जननी जग में या मुख की कहाँ कालिमा ध्वैहौं ? क्यौं हौं आजु होत सुचि सपथनि , कौन मानिहै साँची ? महिमा मृगी कौन सुकृती की खल बच बिसिषन्ह बाँची ? इसी प्रकार चित्रकूट में राम के सम्मुख जाते हुए भरत की दशा का भी सुंदर चित्रण है बिलोके दूरि तें दोउ वीर।
- आपने ऋग्वेद 10 - 61 - 7 का अर्थ इस प्रकार लिखा है - जिस समय पिता ने अपनी कन्या ( उषा ) के साथ सम्भोग किया , उस समय पृथिवी के साथ मिलकर शुक्र का सेक किया अर्थात वीर्य सींचा , सुकृती देवों ने व्रतरक्षक ब्रह्म ( वास्तोष्पति वा रूद्र ) का निर्माण किया ।
- आपने ऋग्वेद 10 - 61 - 7 का अर्थ इस प्रकार लिखा है - जिस समय पिता ने अपनी कन्या ( उषा ) के साथ सम्भोग किया , उस समय पृथिवी के साथ मिलकर शुक्र का सेक किया अर्थात वीर्य सींचा , सुकृती देवों ने व्रतरक्षक ब्रह्म ( वास्तोष्पति वा रूद्र ) का निर्माण किया ।
- भावार्थ : - वे सुकृती ( पुण्यात्मा पुरुष ) धन्य हैं जो वेद रूपी समुद्र ( के मथने ) से उत्पन्न हुए कलियुग के मल को सर्वथा नष्ट कर देने वाले , अविनाशी , भगवान श्री शंभु के सुंदर एवं श्रेष्ठ मुख रूपी चंद्रमा में सदा शोभायमान , जन्म-मरण रूपी रोग के औषध , सबको सुख देने वाले और श्री जानकीजी के जीवनस्वरूप श्री राम नाम रूपी अमृत का निरंतर पान करते रहते हैं॥ 2 ॥