स्त्रीगमन का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- जो ब्राह्मण केवल एक बार के भोजन से सन्तुष्ट रहता और यज्ञ , अध्ययन दानादि षट्कर्मों में सदा लीन रहता और केवल ऋतुकाल में स्त्रीगमन करता है , उसे द्विज कहना चाहिए ॥ १ २ ॥
- ज्योतिष शास्त्र में इस का विश्लेषण शीघ्र और मंद गति से उत्पन्न होने वाले ह्रदय रोगों से किया जाता है जन्मांग चक्र में चतुर्थ स्थान ह्रदय का है इसका कारक ग्रह चंद्रमा है सूर्य से ह्रदय रोगों के कारणों का पता चलता है सिंह राशिः इसकी प्रतिनिधि राशि हैप्राचीन विधाओ में कहा गया है “ स्वाजातिजाया गमने जायते हृदयावार्निया ” अर्थात अपनी गोत्र एवं जाती की स्त्री से गमन करने से यह रोग होता है इसलिए व्यसन एवं स्त्रीगमन से बचाव आवश्यक है