अपदेवता का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- श्री विभूतिभूषण वंद्योपाध्याय ने अपने एक संस्मरणपरक उपन्यास ' आरण्यक ' में बताया है कि कुछ आदिवासियों के अंदर , जिनका संबंध ' आस्ट्रिकों ' -निषादों से जोड़ा जा सकता है , ' टांडवारो ' नामक एक अपदेवता की काष्ठ मूर्त्तियाँ स्थापित करने की प्रथा है।
- इस निचाट स्तब्धता में यह गान किसी अपदेवता के कंठस्वर जैसा सुनाई पड़ता है और मैं एकाध बार चंदर को अँधेरे में भी देखने की चेष्टा करता हूँ कि चंदर ही हैं न ! क्योंकि इस क्षण में और इस जगह पर क्या ठिकाना कब क्या हो जाए।
- यदि सच्चे मन से और विवेकपूर्वक हम नर-देवता को चाहें तो अवश्य पाएँगे-और अगर मूर्खों की तरह चाहें तो जो सब अपदेवता तरह-तरह के ढोंग करते रहते हैं , और हमारे माथे पर अपने चरणों की धूल डालना जिनकी जीविका का साधन है , उनका गुट और धरती का बोझ-बढ़ेगा ही ! ''