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अराज का अर्थ

अराज अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. समाज • े पिछड़े वर्ग में अगर अवसरों में पिछडने • ी हीनभावना बढ़ गई तो वो अराज • स्थितियां उत्पन्न हो स • ती है जरूरत इस बात • ी है • ि शिक्षा • ा प्रसार हो और सभी वर्गों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा • ी जगह प्रतिद्वंद्विता • ी भावना त • बलवती होती है।
  2. जनक छन्द कैसे और किस मनः स्थिति में 0 3 सितम्बर 2001 को अराज जी के मुख से प्रस्फुटित हुआ , किस तरह उसकी संरचना मात्राओं और लय के सन्दर्भ में दोहे के प्रथम चरण पर आधारित है तथा किस तरह के प्रयास इस छन्द के विकास और लोकप्रियता के लिए किए गये , इस सबकी चर्चा इस अध्याय में की गई है।
  3. शोध-समीक्षा ग्रंथ- हृदयेश की कहानियाँ , कृष्ण काव्य परम्परा में नमन, कवि अराज और उनका रामकाव्य, मधुकाव्य में जीवन दर्शन, पुष्पेन्द्र वर्णवाल के विगीत, गाँधी काव्य परम्परा और गाँधी चरितामृत, रामकाव्य का इतिहास, स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी कविता में अराज काव्य का मूल्यांकन, उत्तर रामचरित और आधुनिक प्रबंध काव्य परम्परा, डॉ० अराज का गद्य साहित्य, डॉ० सुन्दरलाल कथूरिया का कृतित्व विश्लेषण और मूल्यांकन, रघुवंश और रामचरितमानस।
  4. शोध-समीक्षा ग्रंथ- हृदयेश की कहानियाँ , कृष्ण काव्य परम्परा में नमन, कवि अराज और उनका रामकाव्य, मधुकाव्य में जीवन दर्शन, पुष्पेन्द्र वर्णवाल के विगीत, गाँधी काव्य परम्परा और गाँधी चरितामृत, रामकाव्य का इतिहास, स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी कविता में अराज काव्य का मूल्यांकन, उत्तर रामचरित और आधुनिक प्रबंध काव्य परम्परा, डॉ० अराज का गद्य साहित्य, डॉ० सुन्दरलाल कथूरिया का कृतित्व विश्लेषण और मूल्यांकन, रघुवंश और रामचरितमानस।
  5. शोध-समीक्षा ग्रंथ- हृदयेश की कहानियाँ , कृष्ण काव्य परम्परा में नमन, कवि अराज और उनका रामकाव्य, मधुकाव्य में जीवन दर्शन, पुष्पेन्द्र वर्णवाल के विगीत, गाँधी काव्य परम्परा और गाँधी चरितामृत, रामकाव्य का इतिहास, स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी कविता में अराज काव्य का मूल्यांकन, उत्तर रामचरित और आधुनिक प्रबंध काव्य परम्परा, डॉ० अराज का गद्य साहित्य, डॉ० सुन्दरलाल कथूरिया का कृतित्व विश्लेषण और मूल्यांकन, रघुवंश और रामचरितमानस।
  6. जनक छन्द के कविगण ए- 4 आकार के पन्ने पर चारों ओर हाशिया छोड़कर पन्ने के एक ओर काली स्याही से अपना नाम-पता , जनक संबंधी कृतित्व और अपने 10 - 15 तक उत्तम जनक छन्द डा . अराज जी को उनके पते- बी- 2 -बी- 34 , जनकपुरी , नई दिल्ली- 58 ( फोन 0 11 - 25525386 / 0 9971773707 ) के पते पर शीघ्र भेज सकते हैं।
  7. जनक छन्द के कविगण ए- 4 आकार के पन्ने पर चारों ओर हाशिया छोड़कर पन्ने के एक ओर काली स्याही से अपना नाम-पता , जनक संबंधी कृतित्व और अपने 10 - 15 तक उत्तम जनक छन्द डा . अराज जी को उनके पते- बी- 2 -बी- 34 , जनकपुरी , नई दिल्ली- 58 ( फोन 0 11 - 25525386 / 0 9971773707 ) के पते पर शीघ्र भेज सकते हैं।
  8. जनक छन्द एक नया छन्द है , तदापि इसके प्रणेता डॉ . ओम्प्रकाश भाटिया ‘ अराज ' जी के व्यक्तित्व एवं जनक छन्द के लिए उनके तमाम प्रयासों , जनक छन्द की पृष्ठ-भूमि एवं विकास यात्रा और उसकी रचना-प्रक्रिया व रचनात्मकता के तमाम पक्षों आदि को विस्तार से आलेखों , साक्षात्कार एवं प्रतिनिधि जनक छन्द रचनाओं के माध्यम से सामने रखा गया है जनक छन्द विशेषांक ( अंक 20 ) में।
  9. साहित्य-साधक अराज ' ( सम्पादक डॉ . सुन्दर लाल कथूरिया ) , ‘ चेतना के पंख : डॉ . अराज का व्यक्तित्व और कृतित्व ( सम्पादक : डॉ . अशोक भाटिया ) , कवि अराज और उनका रामकाव्य ( लेखक : डॉ . कृष्णगोपाल मिश्र ) , ‘ स्वातन्त्रोत्तरी हिन्दी कविता में अराज-काव्य का मूल्यांकन ' ( लेखक : डॉ . कृष्णगोपाल मिश्र ) , डॉ . अराज का गद्य-साहित्य ( लेखक : डॉ . कृष्णगोपाल मिश्र ) आदि प्रमुख हैं।
  10. साहित्य-साधक अराज ' ( सम्पादक डॉ . सुन्दर लाल कथूरिया ) , ‘ चेतना के पंख : डॉ . अराज का व्यक्तित्व और कृतित्व ( सम्पादक : डॉ . अशोक भाटिया ) , कवि अराज और उनका रामकाव्य ( लेखक : डॉ . कृष्णगोपाल मिश्र ) , ‘ स्वातन्त्रोत्तरी हिन्दी कविता में अराज-काव्य का मूल्यांकन ' ( लेखक : डॉ . कृष्णगोपाल मिश्र ) , डॉ . अराज का गद्य-साहित्य ( लेखक : डॉ . कृष्णगोपाल मिश्र ) आदि प्रमुख हैं।
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