अरिष्टनेमि का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- ) का ' अरिष्टनेमि ' ( हरिवंश ) पुराण , रविषेण का ' पद्मपुराण ' और गुणभद्र का ' उत्तरपुराण ' ।
- यदि आर्यों के आने के बाद से भी देखें तो ऋषभदेव और अरिष्टनेमि को लेकर जैन धर्म की परम्परा वेदों तक पहुंचती है।
- ये महाकाव्य प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव से लेकर शांतिनाथ , पाश्र्वनाथ, अरिष्टनेमि, सुव्रत स्वामी, अष्टादश तीर्थंकर चरिर्त और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी से संबंधित हैं।
- जैनों के सलाक पुरुषों में वासुदेव और बलदेव भी हैं तथा अरिष्टनेमि और वासुदेव के सम्बन्ध का भी उल्लेख प्राचीन जैन साहित्य में मिलता है।
- जैनों के सलाक पुरुषों में वासुदेव और बलदेव भी हैं तथा अरिष्टनेमि और वासुदेव के सम्बन्ध का भी उल्लेख प्राचीन जैन साहित्य में मिलता है।
- किंतु यदि आर्यों के आगमन के बाद से भी देखा जाये तो ऋषभदेव और अरिष्टनेमि को लेकर जैन धर्म की परंपरा वेदों तक पहुँचती है।
- विष्णु पुराण में श्री ऋषभदेव , मनुस्मृति में प्रथम जिन ( यानी ऋषभदेव ) स्कंदपुराण , लिंगपुराण आदि में बाईसवें तीर्थंकर अरिष्टनेमि का उल्लेख आया है।
- सिन्धु घाटी की सभ्यता से मिली योग मूर्ति तथा ऋग्वेद के कतिपय मंत्रों में ऋषभदेव तथा अरिष्टनेमि जैसे तीर्थंकरों के नाम इस विचार के मुख्य आधार हैं।
- यह मंत्र है - स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा : स्वस्ति न : पूषा विश्ववेदा : स्वस्तिनस्ता रक्षो अरिष्टनेमि : स्वस्ति नो बृहस्पर्तिदधातु इस मंत्र में चार बार स्वस्ति शब्द आता है।
- ' ' आगे चलकर ब्रहा्रा जी के मन से उत्पन्न हुए मरीचि ऋषि , जिन्हें ‘ अरिष्टनेमि ' के नाम से भी जाना जाता है , का विवाह देवी कला से हुआ।