अर्द्धविक्षिप्त का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- आज मैंने मौत को देखा ! अर्द्धविक्षिप्त अवस्था में हवस की शिकारवो सड़क के किनारे पड़ी थी!ठण्डक में ठिठुरते भिखारी केफटे कपड़ों से वह झांक रही थी!किसी के प्रेम की परिणति बनीमासूम के साथ नदी में बह रही थी!नई-नवेली दुल्हन को दहेज की खातिरजलाने को तैयार
- आज मैंने मौत को देखा ! अर्द्धविक्षिप्त अवस्था में हवस की शिकारवो सड़क के किनारे पड़ी थी!ठण्डक में ठिठुरते भिखारी केफटे कपड़ों से वह झांक रही थी!किसी के प्रेम की परिणति बनीमासूम के साथ नदी में बह रही थी!नई-नवेली दुल्हन को दहेज की खातिरजलाने को तैयार
- सझली कम्मों ने कहीं सुन लिया था कविता कहानी , लिखने वाले अर्द्धविक्षिप्त होते हैं , सो निम्मो को समझाती - ” अरी हिन्दी वालों के दिमाग का थोड़ा स्क्रू ढीला होता है , उमा दी भी तो हिन्दी वाली है न ? “
- ‘इट्स ऑल नानसेंस , एक अर्द्धविक्षिप्त वृद्ध भिक्खु की सेवा में अजामिलकुसुम आश्रम, गोपेश्वर में एक लंबे अंतराल पर ‘वह' देखा गया था, इस बात की कोई तस्दीक नहीं किसने देखा था, और जब देखा था तब क्या क्लैरिनेट मैन वॉज़ प्लेइंग हिज़ क्लैरिनेट?
- आज मैंने मौत को देखा ! अर्द्धविक्षिप्त अवस्था में हवस की शिकारवो सड़क के किनारे पड़ी थी!ठण्डक में ठिठुरते भिखारी केफटे कपड़ों से वह झांक रही थी!किसी के प्रेम की परिणति बनीमासूम के साथ नदी में बह रही थी!नई-नवेली दुल्हन को दहेज की खातिरजलाने को तैयार...
- आज मैंने मौत को देखा ! अर्द्धविक्षिप्त अवस्था में हवस की शिकारवो सड़क के किनारे पड़ी थी!ठण्डक में ठिठुरते भिखारी केफटे कपड़ों से वह झांक रही थी!किसी के प्रेम की परिणति बनीमासूम के साथ नदी में बह रही थी!नई-नवेली दुल्हन को दहेज की खातिरजलाने को तैयार...
- आज मैंने मौत को देखा ! अर्द्धविक्षिप्त अवस्था में हवस की शिकारवो सड़क के किनारे पड़ी थी!ठण्डक में ठिठुरते भिखारी केफटे कपड़ों से वह झांक रही थी!किसी के प्रेम की परिणति बनीमासूम के साथ नदी में बह रही थी!नई-नवेली दुल्हन को दहेज की खातिरजलाने को तैयार थी!साम्प्रदायिक दंगों की आग मेंवह उन्मादियों का बयान थी!चंद धातु के सिक्कों की खातिरबिकाऊ ईमान थी!आज मैंने मौत को देखा!
- आज मैंने मौत को देखा ! अर्द्धविक्षिप्त अवस्था में हवस की शिकारवो सड़क के किनारे पड़ी थी!ठण्डक में ठिठुरते भिखारी केफटे कपड़ों से वह झांक रही थी!किसी के प्रेम की परिणति बनीमासूम के साथ नदी में बह रही थी!नई-नवेली दुल्हन को दहेज की खातिरजलाने को तैयार थी!साम्प्रदायिक दंगों की आग मेंवह उन्मादियों का बयान थी!चंद धातु के सिक्कों की खातिरबिकाऊ ईमान थी!आज मैंने मौत को देखा!
- स्वेच्छया वह आराम और सेवा नहीं लेती थी , धर्मनिष्ठापूर्वक सभी उपवासों का पालन करती , गरीबों में अपना धन बांटती , संतो के जीवन के विषय को छाड़कर कुछ और नहीं पढ़ती थी , और अपना समय तीर्थयात्रियों , अनाड़ियों , साधु-साध्वियों और अर्द्धविक्षिप्त पवित्र-पुरुषों से वार्तालाप करके व्यतीत करती जो तीर्थयात्रा के लिए स्टेशन जाते हुए उसके घर पर विश्राम के लिए रुकते थे .
- आज मैंने मौत को देखा ! अर्द्धविक्षिप्त अवस्था में हवस की शिकारवो सड़क के किनारे पड़ी थी!ठण्डक में ठिठुरते भिखारी केफटे कपड़ों से वह झांक रही थी!किसी के प्रेम की परिणति बनीमासूम के साथ नदी में बह रही थी!नई-नवेली दुल्हन को दहेज की खातिरजलाने को तैयार थी!साम्प्रदायिक दंगों की आग मेंवह उन्मादियों का बयान थी!चंद धातु के सिक्कों की खातिरबिकाऊ ईमान थी!आज मैंने मौत को देखा! - कृष्ण कुमार यादव