अवसि का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- अवसि उपाय करबि मैं सोई॥3॥ भावार्थ : -मैं उसे तुरंत ही उखाड़ फेंकूँगा, क्योंकि सेवकों का हित करना हमारा प्रण है।
- मानस में संत तुलसीदास जी ने कहा है कि-जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी , सो नृप अवसि नरक अधिकारी .
- जनता की अपेक्षाओं के परिपुष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि - ' जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी, सो नृप अवसि नरक अधिकारी।‘
- जब वे कहते हैं : 'जासु राज प्रिय, प्रजा दुखारी, सो नृप अवसि नरक अधिकारी' तो इसका सम्बन्ध रामराज्य से नहीं है, क्योंकि वहाँ तो सब सुखी, रोग-शोक मुक्त थे।
- लेकिन सामान्य रूप से उन्होंने शासकों को कोसा है , जिनके राज्य में प्रजा दु : खी रहती है - जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी , सो नृप अवसि नरक अधिकारी।
- और कहा ‘ ” जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी . सो नृप अवसि नरक अधिकारी . ” ” दंड एवं पुरस्कार शाशकीय संतुलन को समन्वित एवं व्यवस्थित बनाने वाले शकट के दो पहिये है .
- जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी , सो नृप अवसि नरक अधिकारी यदि आज गाँधी होते तो कम से कम यह दृष्य तो हमें नहीं देखना पड़ता कि कार , टी . वी . , फ्रिज जैसी विलासिता की वस्तुएं तो सस्ती हो रही हैं और निर्वाह के लिये आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान पर।
- वस्तुतः पंत को जनतंत्र भी चाहिए और आर्थिक समानता भी . इस यांत्रिक युग में ‘ लोकायतन ‘ की प्रांसंगिकता निर्विवाद है क्योंकि पंत सारे काव्य में अंतर्बाह्य , भौतिक-आध्यात्मिक तथा पूर्व-पश्चिम जैसे द्वंद्वों में समन्वय चाहते हैं - ” इस प्रकार सांस्कृतिक कल्प-नव / भू-जीवन में होता विकसित / एक चेतना रस-साजर में / विविध रूप उठ होते अवसि त.
- ( डर तो अपनी जगह है ही , मेरा डील डौल भी सलमान खान की तरह नहीं है की जहाँ तहाँ शर्ट उतारी जाय , भुखमरे का पेट निकलना कितना विरोधाभासी है न ! ) तो एक धर्मप्राण देश में मेरे लिए एक आखिरी रास्ता बचता है , जिसकी वास्तविकता पर विश्वास करने वाला वैसे आज बहुत कम लोग रह गए हैं , भागवान का डर दिखाना , जो कलिकाल में तुलसी बाबा ने किया था - जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी , सो नृप अवसि नरक अधिकारी।