आज्य का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- जुहू का आज्य समाप्त होने पर इसके आज्य को जुहू में लेकर आहुति दी जाती है- आश्वत्क्ष्युपभृत ( का . श्रौ . 1.3.3.6 ) आज्यस्थाली में से चार स्रुवा आज्य जुहू में आठ स्रुवा उपभृत में और चार स्रुवा धु्रवा में रखने का विधान है ।
- रस रूप द्रव्य को भी आज्य कहा गया है- रस आज्यम् ( शत . ब्रा . 3.7.1.13 ) देवगण आज्य से ही संतुष्ट होते हैं- एतद्वै जुष्टं देवाना यदाज्यम् ( शत . 1.7.2.1 ) अखण्ड हवन में सूर्यास्त के बाद के प्रत्येक प्रहर में क्रमशः आज्य , सतू , धाना और लाजा से हवन करने को कहा गया है- आज्यसूक्त धानालाजानामेकै जुहोति ( का . श्रौ .2 ( .4 .32 )
- रस रूप द्रव्य को भी आज्य कहा गया है- रस आज्यम् ( शत . ब्रा . 3.7.1.13 ) देवगण आज्य से ही संतुष्ट होते हैं- एतद्वै जुष्टं देवाना यदाज्यम् ( शत . 1.7.2.1 ) अखण्ड हवन में सूर्यास्त के बाद के प्रत्येक प्रहर में क्रमशः आज्य , सतू , धाना और लाजा से हवन करने को कहा गया है- आज्यसूक्त धानालाजानामेकै जुहोति ( का . श्रौ .2 ( .4 .32 )
- रस रूप द्रव्य को भी आज्य कहा गया है- रस आज्यम् ( शत . ब्रा . 3.7.1.13 ) देवगण आज्य से ही संतुष्ट होते हैं- एतद्वै जुष्टं देवाना यदाज्यम् ( शत . 1.7.2.1 ) अखण्ड हवन में सूर्यास्त के बाद के प्रत्येक प्रहर में क्रमशः आज्य , सतू , धाना और लाजा से हवन करने को कहा गया है- आज्यसूक्त धानालाजानामेकै जुहोति ( का . श्रौ .2 ( .4 .32 )