ईशोपनिषद् का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- संग्रहगुरु जीभगत कबीर दास जीमीरा बाई जी दासगणु को ईशोपनिषद् का रहस्य नौकरानी द्वारा सिखाना
- ईशोपनिषद् कहती है कि संसार में जो भी जड़-चेतन है , उसका स्वामी परमेश्वर है .
- ईशोपनिषद् का निर्देश है कि इनमें से उपेक्षा किसी की भी नहीं की जा सकती ।
- इसीलिए ईशोपनिषद् के ऋषि ने कहा है ' ' विद्या और अविद्या इन दोनों को समझो ।
- ईशोपनिषद् - एक समय श्री दासगणू ने ईशोपनिषद् पर टीका ( ईशावास्य-भावार्थबोधिनी ) लिखना प्रारम्भ किया ।
- ईशोपनिषद् - एक समय श्री दासगणू ने ईशोपनिषद् पर टीका ( ईशावास्य-भावार्थबोधिनी ) लिखना प्रारम्भ किया ।
- इतना ही नही , अन्य उपनिषद् तो केवन ईशोपनिषद् में वर्णित गूढ़ तत्वों पर ही आधारित टीकायें है ।
- इतना ही नही , अन्य उपनिषद् तो केवन ईशोपनिषद् में वर्णित गूढ़ तत्वों पर ही आधारित टीकायें है ।
- पण्डित सातवलेकर द्घारा रचित वृहदारण्यक उपनिषद् एवं ईशोपनिषद् की टीका प्रचलित टीकाओं में सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है ।
- पण्डित सातवलेकर द्घारा रचित वृहदारण्यक उपनिषद् एवं ईशोपनिषद् की टीका प्रचलित टीकाओं में सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है ।