उल्लाला का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- दूसरे प्रकार का मिश्रित छंद है “छप्पय” जिसमें चार चरण रोला के देकर दो उल्लाला के दिए जाते हैं।
- अधिकांशतः छप्पय में रोला के 4 चरणों के पश्चात् उल्लाला के 2 दल ( पद या पंक्ति) रचे जाते हैं।
- वीर गाथा काल में उल्लाला तथा रोल को मिलकर छप्पय छंद की रचना की जाने से इसकी प्राचीनता प्रमाणित है।
- ' अभिनव प्रयोग- उल्लाला गीत: जीवन सुख का धाम है संजीव 'सलिल' * जीवन सुख का धाम है, ऊषा-साँझ ललाम है.
- जगन्नाथ प्रसाद ' भानु' रचित छंद प्रभाकर तथा ॐप्रकाश 'ॐकार' रचित छंद क्षीरधि के अनुसार उल्लाल तथा उल्लाला दो अलग-अलग छंद हैं।
- अर्थात उल्लाला में 13 कलाएं ( मात्राएँ) होती हैं दस मात्राओं के अंतर पर ( अर्थात 11 वीं मात्रा) एक लघु होना अच्छा है।
- ( छप्पय छंद : दो रोला (११+१३) व एक उल्लाला (१५+१३) के संयोग से निर्मित छः चरणों वाला अर्ध सम मात्रिक संयुक्त छंद है )
- उल्लाला में कहीं २ ६ कहीं २ ८ मात्रायें होती हैं और पूरे छप्पय में कुल १ ४ ८ या १ ५ २ मात्रायें होती हैं।
- 13 मात्राओं वाले उल्लाला के सन्दर्भ में एक दिलचस्प तथ्य यह है कि यह बिल्कुल दोहे की तरह होता है , बस दूसरे चरण में केवल दो मात्रायें बढ़ जाती…
- छप्पय [ सं-पु . ] ( काव्यशास्त्र ) छह चरणों वाला एक मात्रिक छंद , जिसके पहले चरण में रोला के और फिर दो चरण उल्लाला के होते हैं।