कपोती का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- * उपर्युक्त सभी व्याख्याओं की समीक्षा के बाद यह कहा जा सकता है कि कणाद संज्ञा एक शास्त्रीय पद्धति के वैशिष्ट्रय के कारण है , न कि कपोती वृत्ति के कारण।
- कपोती गुस्सा गयी , “ ऐसा भी क्या , आठ सुर्री तो सर को छूती सी निकल गयीं ” , उलाहना मारा , “ हिले तक नहीं तुम तो गुटर-गूं ” ।
- कपोती ने उड़ान लेते हुए चोंच मारी , ” पट्टी बाँध कर भी उड़ा दो , जाओगे तब भी बालकनी की तरफ़ , -हूं -गांव जायेंगे ये -दिल्ली से दू र. .
- कपोत ने आँखों मे थोड़ा ज़्यादा लाड़ भरा और सहलाते हुए चोंच से छुआ , “ गुटर-गुटर कपोती ! बोलती क्यों नहीं ? ” ब-मुश्किल कपोती ने चोंच खोली , ” गुटर-सारी रात नींद नही आई।
- कपोत ने आँखों मे थोड़ा ज़्यादा लाड़ भरा और सहलाते हुए चोंच से छुआ , “ गुटर-गुटर कपोती ! बोलती क्यों नहीं ? ” ब-मुश्किल कपोती ने चोंच खोली , ” गुटर-सारी रात नींद नही आई।
- जिसमे गोते लगा खोज लूं अलंकार के मोती , मनमानी स्वच्छंद उड़े लय की वह श्वेत कपोती , ताल रिदम सरगम संग लेकर गूंजें मधुर अलापें ; नाल पखावज अरु मृदंग पर पड़ें जोर की थापें .
- कपोत ने शंका ज़ाहिर की , “ गूं- कहीं फंदा भी हुआ तो- ? ” “ बावले हो ” , कपोती ने शंका निवारण की ” फंदे दूसरी जात के कपोतों के लिये डाले जाते है।
- कपोत ने शंका ज़ाहिर की , “ गूं- कहीं फंदा भी हुआ तो- ? ” “ बावले हो ” , कपोती ने शंका निवारण की ” फंदे दूसरी जात के कपोतों के लिये डाले जाते है।
- कपोती से रहा नहीं गया , “ क्योंजी , समाप्त हो गयी क्या तुम्हारी कथा ? ” कपोत चुप सा हो गया , “ पता नहीं कपोती , इंसान ज़्यादा समझदार है -वो ही बोले-गुटर-गूं , गुटर-गूं ”
- कपोती से रहा नहीं गया , “ क्योंजी , समाप्त हो गयी क्या तुम्हारी कथा ? ” कपोत चुप सा हो गया , “ पता नहीं कपोती , इंसान ज़्यादा समझदार है -वो ही बोले-गुटर-गूं , गुटर-गूं ”