कलि काल का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- इस मुश्किल वक्त में वे हर जटिल मसले पर हमेशा की तरह निश्चिंत रहें , द्वंद्व और बेचैनी को पास न फटकने दें तो निश्चय ही उनके सानिध्य से इस कलि काल में जनता को प्रेरणा मिलती रहेगी।
- भक्तजनों की क्या कहिये , वैसे ही कलि काल है उनकी संख्या घटती बढ़ती रहती है मगर आज तो बहुत ही कम हो गयी -बस घर के दुई परानी -बेटे और पत्नी -बिटिया बाहर है नहीं तो वह भी एक भक्त श्रोता है .
- क्षणभंगुर जीवन की कलिका , कल प्रात को जाने खिली न खिली मलयाचल की शुचि शीतल मंद , समीर न जानें , बही न बही ! कलि काल कुठार लिए फिरता , तन नम्र से चोट झिली न झिली , भजि ले हरि नाम अरी रसना , फिर अंत समय में हिली न हिली !
- क्षणभंगुर जीवन की कलिका , कल प्रात को जाने खिली न खिली मलयाचल की शुचि शीतल मंद , समीर न जानें , बही न बही ! कलि काल कुठार लिए फिरता , तन नम्र से चोट झिली न झिली , भजि ले हरि नाम अरी रसना , फिर अंत समय में हिली न हिली !
- अब तक जो ( अल्प) भी रामचरित मानस को पढ़ा, पाठ किया या सुना है उससे मैं एक निष्कर्ष पे पहुंचता हूँ कि वेद-उपनिषद् में जो गूढ़ श्लोक हैं उसका सुन्दर ढंग से सरलीकरण गोस्वामी जी ने किया है.कई ग्रंथों में कलि काल में इश्वर के मार्ग के लिए नाम जप को प्रमुखता दी गई है.
- किन्तु देसी डॉक्टरों का मानना है कि हिन्दुस्तानी सदैव गणित में कमजोर रहता है , चौथा पेग पीते हुए भी कहता है कि यह दूसरा ही है ( हरभजन / मुरलीधरन वाले , बल्लेबाज का माथा घुमाने वाला जैसा - नाम भी कुछ पुरातन काल में ले जा सकते हैं , और नाम इसलिए भी रखे जाते हैं कि इसी बहाने भगवान् का नाम तो ले लिया जायेगा कलि काल में भी : )
- सामूहिक यज्ञों द्वारा लोक कल्याण की जो पुनीत परम्परा हमारे पूर्वजों ने स्थापित की थी , उसी का फल है कि इस कलि काल में भी हमने सहस्र कुण्डीय जैसे विशाल यज्ञ दर्शन किए जिस प्रकार विश्व कल्याणार्थ हुए सहस्र कुण्डीय यज्ञ में दूर- दूर से अनेक विद्वान विचारक और संत महात्मा एकत्रित हुए थे और ऋषियों के नाम पर बनाये हुए नगरों में ठहरे थे , इसी प्रकार ब्रह्मदेव द्वारा आयोजित उस यज्ञ लोक- कल्याण की भावना से अनेक ऋषि मुनि आदि एकत्रित हुए थे ।।
- रिंग प्लैनेट ' , नौवां यानि छल्लेदार शनि ग्रह ( ‘ सूर्यपुत्र ' , सुदर्शन चक्र धारी विष्णु का प्रतिरूप ) के सार से बना नर्वस सिस्टम कितनी कुल शक्ति और सूचना इन ग्रहों से ( “ गज और ग्रह ” की कहानी में प्रदर्शित ‘ विष्णु की कृपा से ' ) ग्रहण कर मानव मस्तिष्क रुपी कंप्यूटर तक उठा पाता है ,,, जो अधिकतर सीमित होता है क्यूंकि अधिकतर आम आदमी रोटी , कपड़ा , मकान ( ब्रह्मा-विष्णु-महेश के कलि काल में प्रतिबिम्ब ? ) पाना ही अपना उद्देश्य मान कर जीता है …