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ख़सम का अर्थ

ख़सम अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. “ क्या कहता था जंगी तुझसे . .. बता ... बा ल. .. ” वह जैसे एक बोझ के नीचे दबकर बोलीं , “ ख़सम खानी , अब बोलती क्यों नहीं ? ”
  2. पति , मर्द, शौहर, घरवाला, मियाँ, आदमी, ख़सम, खसम, स्वामी, अधीश, नाथ, कांत, कंत, परिणेता, वारयिता, दयित - स्त्री की दृष्टि से उसका विवाहित पुरुष “शीला का आदमी किसानी करके परिवार का पालन-पोषण करता है“
  3. वास्तव में करबला की नींव उसी समय पड़ गई थी कि जब शैतान ने हज़रत आदम से पहली बार ईर्ष्या की थी और यह ख़सम खाई थी कि वह अल्लाह के बंदों को उसके रास्ते से भटकाता रहेगा।
  4. , तुम्हे अपने मास्टर पर डोरे डालते हुए शरम नही आई इतनी ही ज़्यादा खुजली हो रही थी तो गाँव के किसी लड़के को ख़सम बना लेती अपना इतने पीछे पड़े रहते हैं तेरे सो जाती किसी के सा थ. ..
  5. दुन्या में पैदायशी तौर पर पर सब इंसान हैं जो इन्सान नहीं है वह हैवान हैं ( गाँधी जी ) मैं इस्लामी ओलिमा को “ अपनी माँ के ख़सम ” लिखता हूँ जब उनकी बातों में अय्यारी महसूस करता हूँ .
  6. पाकिस्तान ओर स्क़ोटलेंड यार्ड की पुलिस का वेस्ट इंडीस मे रिश्तेदारी बनी हे बोब वूल्मर की मौत का बाद दोनो ने ब्याह रचाया और हनीमून वूल्मर की लाश पे ही मनाया अब बेंज़िर की लाश पे सुनहेरा संसार रचाएं गे पाकिस्तान को इस मे लाभ ही होगा आख़िर ख़सम अँग्रेज़ जो हे
  7. इस मौके पर फ्रेज़र के बंदूकधारी शहसवार और लठैत के संवाद के वर्णन का एक अंश दर्शनीय है , जो भाषा के चुटीलेपन, अपनी पहचान के गौरव और फ़र्ज अदायगी की अनूठी मिसाल पेश करता है- ‘फ्रेज़र ने होश सलामत रखे और ख़ुद कुछ न कहा लेकिन उसका इशारा समझकर एक शहसवार घोड़ा डपटाकर क़राबीन ताने हुए आगे आया और कड़ककर लठैत से बोला, ‘‘अबे माँ के ख़सम, खड़ा देखता क्या है?
  8. इस मौके पर फ्रेज़र के बंदूकधारी शहसवार और लठैत के संवाद के वर्णन का एक अंश दर्शनीय है , जो भाषा के चुटीलेपन, अपनी पहचान के गौरव और फ़र्ज अदायगी की अनूठी मिसाल पेश करता है- 'फ्रेज़र ने होश सलामत रखे और ख़ुद कुछ न कहा लेकिन उसका इशारा समझकर एक शहसवार घोड़ा डपटाकर क़राबीन ताने हुए आगे आया और कड़ककर लठैत से बोला, “अबे माँ के ख़सम, खड़ा देखता क्या है?
  9. थर्ड क्लास वोही समाजवादी मानसिकता , तिरया चरित्र जाने ना कोई , ख़सम मार के सती से होइ , ताली एक हाथ से नहीं बजती , औरत की शारीरिक भूख कभी नहीं मिट सकती , वेश्या ज़्यादातर अपने काम को आनंद के लिए करती है और उसे छोड़ना नहीं चाहती , अपवाद पर कहानियाँ लिख कर झूठी हमदर्दी और जल्दी कमाई हो सकती है , मौलिकता नहीं , समझी अन्नू देवी
  10. थर्ड क्लास वोही समाजवादी मानसिकता , तिरया चरित्र जाने ना कोई , ख़सम मार के सती से होइ , ताली एक हाथ से नहीं बजती , औरत की शारीरिक भूख कभी नहीं मिट सकती , वेश्या ज़्यादातर अपने काम को आनंद के लिए करती है और उसे छोड़ना नहीं चाहती , अपवाद पर कहानियाँ लिख कर झूठी हमदर्दी और जल्दी कमाई हो सकती है , मौलिकता नहीं , समझी अन्नू देवी
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