गर्ग ऋषि का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- चन्द्रानना बोलती हैं कि हमने गर्ग ऋषि से तुलसी पूजा की महिमा सुना था | राधा रानी यहाँ पर तुलसी की आराधना करती हैं और गर्ग जी को बुलाकर आश्विनी शुक्ल पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक व्रत का अनुष्ठान करती हैं |
- गर्ग ऋषि के प्रपौत्र , महर्षि चित्र, यज्ञ करने का निश्चय करके अरुण के पुत्र महात्मा उद्दालक (गौतम) को प्रधान ऋत्विक के रूप में आमन्त्रित करते हैं, परन्तु मुनि उद्दालक स्वयं न जाकर अपने पुत्र श्वेतकेतु को यज्ञ सम्पन्न कराने के लिए भेज देते हैं।
- गर्ग ऋषि के प्रपौत्र , महर्षि चित्र, यज्ञ करने का निश्चय करके अरुण के पुत्र महात्मा उद्दालक (गौतम) को प्रधान ऋत्विक के रूप में आमन्त्रित करते हैं, परन्तु मुनि उद्दालक स्वयं न जाकर अपने पुत्र श्वेतकेतु को यज्ञ सम्पन्न कराने के लिए भेज देते हैं।
- बीजवपन- उत्तम बीज संग्रह हेतु पाराशर ऋषि , गर्ग ऋषि का मत प्रकट करते हुए कहते हैं कि बीज को माघ (जनवरी-फरवरी) या फाल्गुन (फरवरी-मार्च) माह में संग्रहित करके धूप में सुखाना चाहिए तथा उन बीजों को बाद में अच्छी और सुरक्षित जगह रखना चाहिए।
- बीजवपन- उत्तम बीज संग्रह हेतु पाराशर ऋषि , गर्ग ऋषि का मत प्रकट करते हुए कहते हैं कि बीज को माघ (जनवरी-फरवरी) या फाल्गुन (फरवरी-मार्च) माह में संग्रहित करके धूप में सुखाना चाहिए तथा उन बीजों को बाद में अच्छी और सुरक्षित जगह रखना चाहिए।
- विष्णु पर इन मतबूआ बंग बासी 1956 सफ़हा 313 , 314 पर लिखा है कि गौ माँस से पुत्र लोग ग्यारह माह तक तृप्त रहते थे चुनांचे शुप्राण अध्याय 63 में कोशिक के पुत्र गर्ग ऋषि के शागिर्दों को श्राद्ध में गौ माँस खाने का ज़िक्र आता है।
- गर्ग ऋषि के प्रपौत्र , महर्षि चित्र , यज्ञ करने का निश्चय करके अरुण के पुत्र महात्मा उद्दालक ( गौतम ) को प्रधान ऋत्विक के रूप में आमन्त्रित करते हैं , परन्तु मुनि उद्दालक स्वयं न जाकर अपने पुत्र श्वेतकेतु को यज्ञ सम्पन्न कराने के लिए भेज देते हैं।
- बीजवपन- उत्तम बीज संग्रह हेतु पाराशर ऋषि , गर्ग ऋषि का मत प्रकट करते हुए कहते हैं कि बीज को माघ ( जनवरी-फरवरी ) या फाल्गुन ( फरवरी-मार्च ) माह में संग्रहित करके धूप में सुखाना चाहिए तथा उन बीजों को बाद में अच्छी और सुरक्षित जगह रखना चाहिए।
- बीजवपन- उत्तम बीज संग्रह हेतु पाराशर ऋषि , गर्ग ऋषि का मत प्रकट करते हुए कहते हैं कि बीज को माघ ( जनवरी-फरवरी ) या फाल्गुन ( फरवरी-मार्च ) माह में संग्रहित करके धूप में सुखाना चाहिए तथा उन बीजों को बाद में अच्छी और सुरक्षित जगह रखना चाहिए।
- अदभुत गोपी ! ऐसी सुन्दरता जिसका वर्णन नहीं हो सकता | गर्ग ऋषि ने उनकी सुन्दरता का वर्णन किया है कि उंगलियों में अंगूठियाँ , कौंधनी , नथ और बड़ी सुंदर बेनी सजाकर बरसाने में आते हैं और वृषभान के भवन में पहुंचते हैं | चार दीवार हैं उस भवन में और वहाँ पर बहुत पहरा है | उन पहरों में नारी रूप में पहुँच जाते हैं |