गुलकारी का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- जनाबे नीरज साहिब जिस ख़लूस से अपने अपने ब्लॉग पर नदीम साहिब की किताब का ज़िक्र किया ऐसा लगा के आप ने नदीम साहिब के ज़ज्बात और एहसासात को बड़ी दयानतदारी से लफ्जों की गुलकारी करके इंसाफ किया है आपके इस अंदाजे मुनादी ने किताब हासिल करने के लिए मुझे लाइन में खडा कर दिया है सप्रेम चाँद शुक्ला हदियाबादी डेनमार्क
- इंडो-ईरानी परिवार की भाषाओं में इनका प्रयोग देखने को मिलता है जैसे - कर ( बुनकर ) , कार ( कर्मकार , कलाकार , कुम्भकार ) , कारी ( कलाकारी , गुलकारी , फूलकारी ) , गार ( गुनहगार , रोज़गार ) , गर ( रफ़ूगर , कारीगर , बाजीगर ) , गरी ( कारीगरी , रफ़ूगर , बाजीगरी ) आदि उदाहरण आम हैं ।
- इंडो-ईरानी परिवार की भाषाओं में इनका प्रयोग देखने को मिलता है जैसे - कर ( बुनकर ) , कार ( कर्मकार , कलाकार , कुम्भकार ) , कारी ( कलाकारी , गुलकारी , फूलकारी ) , गार ( गुनहगार , रोज़गार ) , गर ( रफ़ूगर , कारीगर , बाजीगर ) , गरी ( कारीगरी , रफ़ूगर , बाजीगरी ) आदि उदाहरण आम हैं ।
- जब फागुन रँग झमकते हो तब देख बहारेँ होली की | गुलजार खिले हो परियोँ के और मजलिस की तैयारी हो | कपड़ो पर रँग के छीटोँ से खुश रँग अजब गुलकारी हो | मुँह लाल , गुलाबी आँखे हो और हाथोँ मेँ पिचकारी हो | उस रँग भरी पिचकारी को अँगिया पर तक कर मारी हो | सीनो से रँग ढलकतेँ हो तब देख बहारेँ होली की . -“नजीर अकबराबादी” होली की रंगारंग शुभकामनाए
- जब फागुन रँग झमकते हो तब देख बहारेँ होली की | गुलजार खिले हो परियोँ के और मजलिस की तैयारी हो | कपड़ो पर रँग के छीटोँ से खुश रँग अजब गुलकारी हो | मुँह लाल , गुलाबी आँखे हो और हाथोँ मेँ पिचकारी हो | उस रँग भरी पिचकारी को अँगिया पर तक कर मारी हो | सीनो से रँग ढलकतेँ हो तब देख बहारेँ होली की . - “ नजीर अकबराबादी ”
- जब फ़ागुन रंग झमकते हों , तब देख बहारें होली की कुछ घुँघुरू ताल झमकते हों , तब देख बहारें होली की गुलजार खिले हों परियों के , और मजलिस की तैयारी हो कपड़ों पर रंग के छींटों से , खुश रंग अजब गुलकारी हो मुँह लाल गुलाबी आँखें हों , और हाथों में पिचकारी हो उस रंगभरी पिचकारी को , अंगिया पर तक मारो हो सीनों से रंग ढलकते हों , तब देख बहारें होली की।
- इस श्रंगारिक कृति की पहली पंक्ति है- मौसमे होली का तेरी बज़्म में देखा जो रंग नज़ीर अकबराबादी ने होली पर करीब एक दर्जन नज़्में कही हैं और क्या खूब कही हैं- गुलजार खिले हों परियों के और मजलिस की तैयारी हो कपड़ों पर रंग की छींटों से खुशरंग अजब गुलकारी हो मुँह लाल गुलाबी आँखें हों और हाथों में पिचकारी हो उस रंग भरी पिचकारी को अंगिया पर तक कर मारी हो तब देख नजारे होली के।
- इंडो-ईरानी परिवार की भाषाओं में इनका प्रयोग देखने को मिलता है जैसे - कर ( बुनकर ) , कार ( कर्मकार , कलाकार , कुम्भकार ) , कारी ( कलाकारी , गुलकारी , फूलकारी ) , गार ( गुनहगार , रोज़गार ) , गर ( रफ़ूगर , कारीगर , बाजीगर ) , गरी ( कारीगरी , रफ़ूगर , बाजीगरी ) संस्कृत में जहां यातु का अर्थ व्यापक है वहीं फारसी में यातु , जादू बनकर चमत्कार के अर्थ में सीमित हो गया।
- इंडो-ईरानी परिवार की भाषाओं में इनका प्रयोग देखने को मिलता है जैसे - कर ( बुनकर ) , कार ( कर्मकार , कलाकार , कुम्भकार ) , कारी ( कलाकारी , गुलकारी , फूलकारी ) , गार ( गुनहगार , रोज़गार ) , गर ( रफ़ूगर , कारीगर , बाजीगर ) , गरी ( कारीगरी , रफ़ूगर , बाजीगरी ) संस्कृत में जहां यातु का अर्थ व्यापक है वहीं फारसी में यातु , जादू बनकर चमत्कार के अर्थ में सीमित हो गया।
- मेरी महबूब पस-ए-पर्दा-ए-तशहीर-ए-वफ़ा तूने सतवत के निशानों को तो देखा होता मुर्दा शाहों के मक़ाबिर से बहलने वाली , अपने तारीक़ मकानों को तो देखा होता अनगिनत लोगों ने दुनिया में मुहब्बत की है कौन कहता है कि सादिक़ न थे जज़्बे उनके लेकिन उनके लिये तशहीर का सामान नहीं क्यूँकि वो लोग भी अपनी ही तरह मुफ़लिस थे ये इमारात-ओ-मक़ाबिर, ये फसीलें, ये हिसार मुतल क़ुल्हुक्म शहंशाहों की अज़्मत के सुतून दामन-ए-दहर पे उस रंग की गुलकारी है जिसमें शामिल है तेरे और मेरे अज़दाद का ख़ून मेरी महबूब!