चन्द्रमण्डल का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- सूर्यमण्डल समसूत्र से अपनी कक्षा के समीप में स्थित परन्तु शरबश से पृथक् स्थित चन्द्रमण्डल जब हो तो सिनीवाली होती है , सूर्य मण्डल में आधे चन्द्रमा का प्रवेश जब हो जाये तो दर्श होता है , सूर्यमण्डल तथा चन्द्रमण्डल जब समसूत्रों में हो तो कुहू होती है , अर्थात् चन्द्रमा के अदृश्यमान होने पर।
- इस श्रद्धा नामक मार्ग का सम्बन्ध मध्यान्हकाल में पृथ्वी से होता है , इसलिये ही मध्यान्हकाल में श्राद्ध करने का विधान है,पृथ्वी पर कोई भी वस्तु सूर्यमण्डल तथा चन्द्रमण्डल के सम्पर्क से ही बनती है,संसार में सोम सम्बन्धी वस्तु विशेषत: चावल और जौ ही है,जौ में मेधा की अधिकता है,धान और जौ में रेतस (सोम) का अंश विशेष रूप से रहता है,अश्विन कृष्ण पक्ष में यदि चावल तथा जौ का पिण्डदान किया जावे तो चन्द्रमण्डल को रेतस पहुंच जाता है,पितर इसी चन्द्रमा के ऊर्ध्व देश में रहते है,”विदूर्ध्वभागे पितरो वसन्त: स्वाध: सुधादीधीत मामनन्ति”।
- इस श्रद्धा नामक मार्ग का सम्बन्ध मध्यान्हकाल में पृथ्वी से होता है , इसलिये ही मध्यान्हकाल में श्राद्ध करने का विधान है,पृथ्वी पर कोई भी वस्तु सूर्यमण्डल तथा चन्द्रमण्डल के सम्पर्क से ही बनती है,संसार में सोम सम्बन्धी वस्तु विशेषत: चावल और जौ ही है,जौ में मेधा की अधिकता है,धान और जौ में रेतस (सोम) का अंश विशेष रूप से रहता है,अश्विन कृष्ण पक्ष में यदि चावल तथा जौ का पिण्डदान किया जावे तो चन्द्रमण्डल को रेतस पहुंच जाता है,पितर इसी चन्द्रमा के ऊर्ध्व देश में रहते है,”विदूर्ध्वभागे पितरो वसन्त: स्वाध: सुधादीधीत मामनन्ति”।