चर्मण्वती का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- भारतीय काल से मशहूर वैदिक नदी चर्मण्वती से करभार लेकर यमुना ज्योंही आगे बढ़ती है , त्यों ही मध्ययुगीन इतिहास की झांगी कराने वाली नन्ही-सी सिंधु नदी उसमें आ मिलती है।
- उज्जयिनी से चलकर मेघ का मार्ग गम्भीरा नदी , देवगिरि पर्वत ,, चर्मण्वती नदी , दशपुर , कुरुक्षेत्र और कनखल तक पहुंचा है , और वहाँ से आगे अलकापुरी चला गया है।
- उज्जयिनी से चलकर मेघ का मार्ग गम्भीरा नदी , देवगिरि पर्वत ,, चर्मण्वती नदी , दशपुर , कुरुक्षेत्र और कनखल तक पहुंचा है , और वहाँ से आगे अलकापुरी चला गया है।
- पूर्ववैरिणा ' अर्थात इसके पश्चात सहदेव ने (दक्षिण दिशा की विजय यात्रा के प्रसंग में) चर्मण्वती के तट पर जंभक के पुत्र को देखा जिसे उसके पूर्व शत्रु वासुदेव ने जीवित छोड़ दिया था।
- इसी प्रकार मेघ जब चर्मण्वती नदी से जलग्रहण करने के लिये झुकेगा तो आकाशस्थ देवताओं को दूर से ऐसा प्रतीत होगा मानों पृथिवी के मुक्ताहार के म्ध्य में इन्द्रनीलमणि पिरों दिया गया हो-
- इस काव्य में ताम्रपर्णी , शिप्रा , चर्मण्वती ( चम्बल ) , ब्रह्मपुत्र तथा जय जाह्न्वी नदियों की अवसरानुकूल भिन्न-भिन्न छन्दों में उत्पत्ति , प्रवाह , गति , महत्व आदि पर प्रकाश डाला गया है।
- इस काव्य में ताम्रपर्णी , शिप्रा , चर्मण्वती ( चम्बल ) , ब्रह्मपुत्र तथा जय जाह्न्वी नदियों की अवसरानुकूल भिन्न-भिन्न छन्दों में उत्पत्ति , प्रवाह , गति , महत्व आदि पर प्रकाश डाला गया है।
- अन्य चारों भाइयों को जो प्रदेश दिये गये उनका विवरण इस प्रकार है- यदु को चर्मरावती अथवा चर्मण्वती ( चंबल ) , बेत्रवती ( बेतवा ) और शुक्तिमती ( केन ) का तटवर्ती प्रदेश मिला ।
- के वर्णधारी बँधी दृष्टि से अचल अपलक नयन से लखेंगे सभी सिद्धगण व्योमचारी चर्मण्वती की विपुलधार जो दूर नभ से दिखेगी सरल क्षीण धारा उस पर पड़े तुम दिखोगे वहां ज्यों , धरा के गले में तरल नील माला
- कवि ने कल्पना की है कि जब आकाश में विचरण करने वाले मेघ चर्मण्वती के प्रवाह को देखेंगे तो ऐसा प्रतीत होगा कि मानो वह पृथ्वी का मोतियों का हार हो , जिसमें बीच में इन्द्रनील मणि पिरोया गया हो।